सिनेमा में अपनी अदाकारी की छाप छोड़ने वाले दिग्गज अभिनेता फारुख शेख का जन्म 25 मार्च 1948 को गुजरात के बड़ौदा के पास एक गांव में हुआ था। 'नूरी', 'चश्मे बद्दूर', 'साथ-साथ', 'बाजार' और 'कथा' जैसी फिल्मों के हीरो रहे फारुख आज अगर हमारे बीच होते तो 72 साल के होते। फारुख शेख ने 27 दिसंबर 2013 को दुबई में अचानक ही दुनिया को अलविदा कह दिया था। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था।
फारुख अपने 5 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनके पिता मुस्तफा शेख मुंबई के एक प्रतिष्ठित वकील थे और मां फरीदा शेख गृहिणी। फारुख ने अपनी पढ़ाई मुंबई के सेंट मैरी स्कूल में की। जहां वह पढ़ाई के साथ तमाम नाटकों और खेलकूद की गतिविधियों में हिस्सा लेते थे। फारुख स्कूली दिनों से न केवल क्रिकेट के दीवाने थे बल्कि अच्छे क्रिकेटर भी थे। जब वह सेंट जेवियर कॉलेज में पढ़ने गए तो उनका खेल और निखरा। सुनील गावस्कर फारुख के अच्छे दोस्तों में थे।
कॉलेज में फारुख शेख की मुलाकात रूपा जैन से हुई, जो आगे चलकर उनकी जीवन संगिनी बनीं। फारुख और रूपा ने नौ साल तक एक-दूसरे से मेल-मुलाकातों के बाद शादी का फैसला लिया था। फारुख के जीवन पर उनके पिता का गहरा प्रभाव था और यही कारण था कि उन्होंने वकालत की पढ़ाई की।
फारुख का इरादा पिता की विरासत को आगे ले जाने का था। मुंबई के सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ लॉ से उन्होंने कानून की पढ़ाई की लेकिन वकील बनने के बाद जल्द ही उन्हें महसूस हुआ कि यह पेशा उनके लिए ठीक नहीं है। उनका मानना था कि ज्यादातर मामलों के फैसले अदालत में नहीं बल्कि पुलिस थानों में तय होते हैं। इसके बाद उन्होंने वकालत छोड़ एक्टिंग को तवज्जो देनी शुरू की।
उन्होंने अपनी पहली फिल्म ‘गर्म हवा’ में मुफ्त में काम करने को हामी भरी थी। रमेश सथ्यू यह फिल्म बना रहे थे और उन्हें ऐसे कलाकार चाहिए थे जो बिना फीस लिए तारीखें दे दें। खैर, इस फिल्म के लिए फारुख शेख को 750 रुपये मिले, वह भी 5 साल में। 'गर्म हवा' की रिलीज के बाद फारुख के पास दूसरी फिल्मों के ऑफर आने लगे।