संजय दत्त आज 57 साल के हो रहे हैं। संजय दत्त का फिल्मी करियर साढ़े तीन दशक का हो गया है। संजय दत्त के पिता हिन्दू और मां मुसलमान थी, दोनो अपने जमाने के सुपरस्टार। संजय दत्त की जिंदगी में इतने मोड़ है कि उनकी कहानी किसी फिल्म की कहानी ज्यादा लगती है। जानते हैं क्यों?
किसी फिल्मी कहानी सी है संजय दत्त की जिंदगी
संजय दत्त की जिंदगी पर इन दिनों फिल्म बनाने की बात हो रही है। दरअसल आपको संजय दत्त की जिदंगी किसी फिल्म जैसी ही लगेगी। उनकी जिंदगी में हथियार, ड्रग्स, परिवार, जेल, जमानत, इश्क, दिल टूटना सभी कुछ मौजूद है। मां और बाप दोनों सुपरस्टार थे, संजय दत्त का बचपन बड़े शाही अंदाज में बीता। 1959 में पैदा हुए संजू 1975 में रेशमा और शेरा में बाल कलाकार के तौर पर नजर आए लेकिन एक बड़े सितारे को लोगों ने देखा 1981 में।
किसी फिल्मी कहानी सी है संजय दत्त की जिंदगी
1981 में संजय दत्त की पहली फिल्म आई रॉकी। रॉकी जबरदस्त हिट हुई लेकिन इसी दौरान कैंसर की वजह से उनकी मां नर्गिस की मौत हो गई। संजय मां के करीब थे, मां का छोड़कर जाना संजू को झकझोर गया। वो अंदर से टूट गए। पहली फिल्म रॉकी और फिर विधाता (1982) के हिट होने के बाद संजय का करियर तो बढ़ रहा था लेकिन वो अंदर से टूट रहे थे।
किसी फिल्मी कहानी सी है संजय दत्त की जिंदगी
शुरुआती कामयाबी को संजय संभाल ना सके और ड्रग्स की चपेट में आ गए। संजय दत्त इतना ज्यादा नशा करते थे कि सबने मान लिया कि अब उनका करियर खत्म। उनको नशे की इतनी ज्यादा लत हो गई थी कि एक दिन वो सोकर उठे तो देखा कि पास में बैठा उनका नौकर रो रहा है, उन्होंने पूछा तो नौकर ने बताया कि बाबा आप दो दिन से बेहोश हैं। नौकर उनको लेकर घबरा गया था। इस दौर में पिता सुनील दत्त और बहन प्रिया ने मिलकर उन्हें मुश्किल दौर से उबारा और तीन साल बाद 1985 में संजय ने फिल्म 'जान की बाजी' से फिर वापसी की।
किसी फिल्मी कहानी सी है संजय दत्त की जिंदगी
पहली फिल्म की सफलता के बाद लड़खड़ा गए संजय दत्त के लिए सुनील दत्त ने दिन-रात मेहनत की थी। उनकी बहन प्रिया ने भाई को नशे की लत से निकालने के लिए बहुत दिल से मेहनत की। इसके बाद वह 1990 के शुरुआती वर्षों तक लगातार सफल रहे और नाम, इनाम दस हजार, इलाका से लेकर सड़क, साजन, खलनायक जैसी फिल्में दीं। इसके बाद 1993 में मुंबई में बम विस्फोट हुए।