अभिनेता आयुष्मान खुराना लगातार अपनी फिल्मों से ये कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह समाज की सोच बदले। उनका मानना है कि अनुशासन ही देश को महान बनाता है और इस अनुशासन की देश के युवाओं को सख्त जरूरत है। बच्चों के खिलाफ हिंसा का अंत करने वाली यूनीसेफ की मुहिम के ब्रांड अंबेसडर आयुष्मान के पास युवाओँ को इस अनुशासन की घुट्टी पिलाने का एक बढ़िया फॉर्मूला भी है।
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आयुष्मान खुराना
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आयुष्मान कहते हैं, "जब देश के युवाओं की सोच एक जैसी होगी और वे बच्चों के खिलाफ़ हिंसा को ख़त्म करने के लिए सेना में शामिल होंगे तभी हम देश में एक बड़े बदलाव की उम्मीद कर सकते हैं। सच कहूं तो देश के युवा ही अपने साथियों को अलग-अलग तरह की हिंसा को पहचानने और अच्छी तरह समझने में मदद कर सकते हैं।”
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आयुष्मान खुराना
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
आयुष्मान इस बात को और विस्तार से समझाते हुए कहते हैं, "सड़क पर किसी लड़की से छेड़छाड़ की स्थिति में अपने दोस्तों को मदद के लिए बुलाने, या अपने साथियों के खिलाफ हो रही हिंसा की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए हेल्पलाइन पर फ़ोन करने / शिकायत दर्ज कराने, मदद मांगने वाले लोगों की सहायता करने, या फिर पीड़ितों के माता-पिता, उनके शिक्षकों या स्कूल अथॉरिटी को उनकी बात सुनने के लिए राजी करने जैसे छोटे-छोटे कदम उठाकर हमारे देश के युवा एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं।”
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आयुष्मान खुराना
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
नए साल में भी आयुष्मान यूनीसेफ के साथ अपनी इस मुहिम को जारी रखेंगे। वह कहते हैं, "यूनिसेफ ने साल 2021 में बच्चों के खिलाफ हिंसा के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाने, इस मुद्दे को चर्चा का विषय बनाने के साथ-साथ इसकी रोकथाम एवं सार्वजनिक कार्रवाई को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य रखा है। साथ ही हमें हिंसा से पीड़ित लोगों की मदद करने वाली संस्थाओं और कार्यक्रमों के लिए अपनी आवाज बुलंद करते रहना चाहिए, और हर मुमकिन तरीके से उन्हें सहारा देना चाहिए।"
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आयुष्मान खुराना
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
आयुष्मान को उम्मीद है कि यूनिसेफ के साथ मिलकर वह उन सभी बच्चों की मदद कर पाएंगे, जिन्हें तुरंत सुरक्षा की जरूरत है। वह कहते हैं, "समाज में बच्चों के खिलाफ हिंसा हर तरफ फैली हुई है, जिसमें बुलीइंग, सेक्सुअल एब्यूज, मार-पीट और ऑनलाइन वायलेंस जैसे हिंसा के कई अलग-अलग रूप शामिल हैं। ज्यादातर मामलों में अपराधी ऐसे लोग होते हैं जिन पर बच्चे बहुत भरोसा करते हैं या जिन्हें अच्छी तरह जानते हैं, और ऐसे लोगों में पेरेंट्स, परिवार के सदस्य, पड़ोसी और दोस्त या रिश्तेदार भी शामिल होते हैं। बच्चों के खिलाफ हर तरह के वायलेंस को खत्म करना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए हम सभी को साथ मिलकर अपनी कोशिश जारी रखनी होगी।”