फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज अक्सर सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते हैं। ऐसे में एक बार फिर विशाल ने पूरे देश में हो रहे विरोधों पर अपनी बात रखी है। विशाल भारद्वाज ने कहा कि छात्रों और नागरिकों का विरोध करना संवैधानिक अधिकार हैं।इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विरोध करने वालों को 'शहरी नक्सली' के तौर पर सरकार की ओर से चिन्हित करना गलत था।
दरअसल पुणे के डेक्कन लिटरेचर फेस्टिवल के कार्यक्रम में बोलते हुए विशाल भारद्वाज ने कहा, 'यह बहुत दुखद है कि हम एक ऐसे प्वाइंट पर हैं जहां कोई भी आलोचना करता है, उसे राष्ट्र-विरोधी करार दिया जा रहा है।'
विशाल ने अपनी बात रखते हुए आगे कहा, 'एक निर्देशक के तौर पर वह यह देखकर प्रभावित हुए है कि उनके आस-पास क्या चल रहा है। हिंसा, शूटिंग, नफरत और भय सभी को प्रभावित कर रहा है। हमें इसका विरोध करते रहना होगा। लोकतंत्र में विरोध करना हर एक नागरिक का मौलिक अधिकार है और हमें ऐसा करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। गांधीजी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने भी अंग्रेजों के खिलाफ विरोध किया और हमें अपनी स्वतंत्रता मिली।'
इसके साथ ही विशाल ने आगे कहा, 'मेरी फिल्म हैदर को आज रिलीज होने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता लेकिन शायद मैं कुछ और बनाता। आप देख सकते हैं क्रिएटिविटी एक अलग रूप में आकार लेती है, इसे मारा नहीं जा सकता, क्योंकि कला पानी की एक धारा की तरह है और इसे बहने से नहीं रोका जा सकता है।'
वहीं फेस्टिवल में अवॉर्ड वापसी पर विशाल ने कहा, ''मेरे बहुत से दोस्तों ने मुझे पुरस्कार लौटाने के लिए कहा है। मैंने उन्हें बताया कि वे जो पुरस्कार मुझे वापस करने के लिए कह रहे थे, वह वर्तमान सरकार द्वारा प्रदान नहीं किए गए थे। बाद में मुझे वर्तमान सरकार के तहत दो राष्ट्रीय पुरस्कार मिले - एक हैदर के लिए और एक तलवार के लिए। अगर मैं उन पुरस्कारों को वापस करता हूं, तो मैं उस जूरी का अनादर करूंगा, जिसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। इसलिए मैंने कभी कोई पुरस्कार नहीं लौटाया और न ही भविष्य में ऐसा करूंगा।'
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