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पढ़ाई के बीच एक्ट्रेस बन जाने पर बोलीं तनिष्ठा चटर्जी, कहा- मेरी जिंदगी में सब अप्रत्याशित होता रहा

Tue, 17 Sep 2019 07:02 AM IST
Mishra Mishra मुंबई डेस्क, अमर उजाला
मुंबई डेस्क, अमर उजाला Published by: Mishra Mishra Updated Tue, 17 Sep 2019 07:02 AM IST
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bollywood actress tannishtha chatterjee exclusive interview with amar ujala
Tannishtha Chatterjee - फोटो : Amar Ujala, Mumbai

बस यूं ही से लेकर ब्रिक लेन, देख इंडियन सर्कस, पार्चड, जल और रोड जैसी फिल्मों के जरिए तनिष्ठा चटर्जी ने सिनेमा में अपनी अदाकारी की एक अलग छाप छोड़ी है। पुणे में जन्मी तनिष्ठा दुनिया घूम चुकी हैं और दिल्ली की आबोहवा ने उनके भीतर अदाकारी का पौधा रोपा। उनकी अगली फिल्म झलकी नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के जीवन से जुड़ी घटनाओं पर आधारित है। 



फिल्म झलकी में आप एक बच्ची को उसके भाई से मिलाने के जतन करने वाली पत्रकार बनी हैं? आप तो खुद भी इन सबसे जुड़ी रही हैं, तो कितना आसान रहा ये रोल निभाना?
जी हां, बाल मजदूरी को लेकर मैं लंबे समय से काम करती रही हूं। अनाथालय के बच्चो के लिए भी काम किया। मेरे बहुत सारे दोस्त पत्रकार हैं। मुझे उनकी दुनिया भी पता है। कह सकते हैं कि इस रोल के लिए मुझे अलग से बहुत कुछ तैयारी नहीं करनी पड़ी।

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Tannishtha Chatterjee - फोटो : Social Media

फिल्म की शूटिंग मिर्जापुर में करीब 47 डिग्री सेल्सियस तापमान में हुई, ये अनुभव कैसा रहा?
मैंने बहुत सारी फिल्मों में इससे भी अधिक गर्मी में काम किया है। मैंने रेगिस्तान में भी फिल्में की हैं तो मेरे लिए यह मुश्किल नहीं रहा। असल में मुझे तो मजा ही आया क्योंकि हमारी टीम बहुत ही अच्छी थी। मिर्जापुर का खाना और गुलाब जामुन बहुत पंसद आए। गर्मी के समय गंगा किनारे नाव में बैठना और वहां के लोगों से बात करने का अनुभव स्पेशल रहा। कलाकार को इन सब चीजों में ही मजा आता है।

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Tannishtha Chatterjee - फोटो : Social Media

एक आम आदमी बचपन बचाओ आंदोलन जैसे मुद्दों से कैसे जुड़ सकता है?
जहां भी बाल मजदूरी दिखती है उसे हमें वहीं रोकना चाहिए। सरकार पर भी लगातार दबाव बनाना चाहिए। सरकार ने अपनी ओर से कानून तो बनाए हुए हैं लेकिन पहले बच्चों की शिक्षा और चिकित्सा को प्राथमिकता बनाना होगा। बड़े शहरों में खेल के मैदान कितने कम हैं। अधिकतर स्कूल इतनी छोटी जगह पर हैं कि सांस लेने तक की जगह नहीं है। बच्चे समाज का सबसे महत्वपूर्ण अंग है उसके बाद कुछ और है।

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tannishtha chatterjee - फोटो : Social Media

दिल्ली की आबोहवा में रसायन विज्ञान पढ़ने वाली एक छात्रा को अदाकारा कैसे बना दिया?
मेरी जिंदगी में सब कुछ अप्रत्याशित ही होता रहा है। अदाकारी भी उनमें से एक है। जब मैं पढ़ रही थी तभी मैंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में एक कार्यशाला की थी। उस कार्यशाला ने मुझे पूरा बदल कर रख दिया। मैं गाना भी गाती थी तो मुझे सभी ने कला से जुड़े क्षेत्र में भविष्य बनाने की सलाह दी और मुझे खुद भी अहसास हुआ कि मुझे इसमें मजा आता है। पिता ने कई बार एमबीए करने की सलाह दी लेकिन मैं कभी भी खुद को एक्टिंग से अलग नहीं कर पाई।

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