एक सीन विजय राज कहते हैं, 'दरअसल हम जब भी हिचकी ले रहे हैं कौवे का आवाज आ रहा है।' इस पे पंकज त्रिपाठी कहते हैं, 'का खाए थे'। विजय राज कहते हैं, 'दरअसल हम पांच रुपये वाला चिकन बिरयानी खाए थे।' पंकज जवाब देते हैं, 'पांच रुपये वाला चिकन बिरयानी...भैया ऊ कौवा बिरयानी है।'
ये सीन साल 2004 में रिलीज हुई फिल्म रन का है जिसमें पंकज त्रिपाठी महज 10 सेकेंड के लिए नजर आए थे। तब किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि ये शख्स एक दिन बॉलीवुड का इतना बड़ा कलाकार बनेगा। पंकज त्रिपाठी का फिल्मी सफर बहुत मुश्किलों भरा रहा है। उन्हें अपनी पहचान बनाने में सालों लग गए। एक वो दौर था जब त्रिपाठी जी ऑडिशन में ईश्वर की सिफारिश लेकर जाया करते थे। ये किस्सा बहुत मजेदार है। आज पंकज त्रिपाठी के जन्मदिन पर आपको बताते हैं ये मजेदार किस्सा...।
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पंकज त्रिपाठी
- फोटो : facebook/impankajtripathi
कुछ दिनों पहले पंकज त्रिपाठी ने अपने फेसबुक पर ये किस्सा शेयर करते हुए बताया था, 'मैं अपनी पत्नी के साथ 2004 में मुंबई आ गया था। मुंबई आने से पहले मैंने पत्नी से कह दिया था कि संघर्ष लंबा होगा इसलिए बीएड कर लो ताकि एक जन कमाता रहे। क्योंकि मुझे नहीं पता था कि मेरा क्या होगा। मुंबई में आते ही मैं शुरुआत में अपने दोस्त के घर रहा। मैं पत्नी के साथ अखबार में स्कूल की नौकरी के इश्तेहार देखता था।'
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पंकज त्रिपाठी
- फोटो : facebook/impankajtripathi
उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने बिना वैकेंसी के ही पत्नी को एक स्कूल में बायोडाटा पहुंचाने के लिए मनाया। इसके बाद उनकी पत्नी ने स्कूल में जाकर बायोडाटा दिया। हालांकि रिसेप्शन पर उन्हें कह दिया गया कि यहां कोई नौकरी नहीं हैं, लेकिन उन्होंने बायोडाटा रख लिया। और ये कहा गया कि अगर नौकरी होगी तो बुला लेंगे।
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पंकज त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
पंकज त्रिपाठी ने आगे बताया, 'उस दौरान मेल की सुविधा नहीं थी। फोटो देखने के बाद ऑडिशन में बुलाया जाता था। तब कास्टिंग डायरेक्टर्स नहीं होते थे और एक्टर्स को कास्ट करने के लिए प्रोफेशनल माहौल नहीं होता था। ऐसे में हमें असिस्टेंट डायरेक्टर्स और ऐसे ही फिल्म की यूनिट से जुड़े लोगों पर निर्भर रहना पड़ता था।'
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पंकज त्रिपाठी
- फोटो : फाइल
उन्होंने कहा, 'मैंने प्रोडक्शन हाउस में कहना शुरू कर दिया था कि मुझे ईश्वर जी ने भेजा है जिसके बाद मेरी एंट्री हो जाया करती थी। जब मुझसे ईश्वर जी के बारे में पूछा जाता था तो मेरे पास कोई जवाब नहीं होता था और मैं ऊपर की तरफ उंगली उठा देता था। कई लोग मेरे सेंस ऑफ ह्यूमर से इंप्रेस हो जाते थे तो कई ऐसे भी थे जो फ्रस्ट्रेट हो जाते थे। इस दौरान मेरी पत्नी की नौकरी लग गई थी जिससे मुश्किल थोड़ी कम हुई।'