दिल्ली में जामिया नगर के बाटला हाउस इलाके में इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादियों के खिलाफ 2008 में हुए ऑपरेशन बाटला हाउस से प्रेरित फिल्म, 'बटला हाउस' ने दिल्ली पुलिस सेल की सात सदस्यीय टीम और संदिग्धमुजाहिदीन के बीच गोलीबारी की कहानी को उजागर किया है। कथित तौर पर ये आतंकवादी 13 सितंबर 2008 को दिल्ली में हुए सिलसिलेवार विस्फोटों में शामिल थे। इस घटना पर बनी फिल्म को भले अदालत के आदेश पर काल्पनिक कहानी बनाकर रिलीज करना पड़ा हो लेकिन इस फिल्म को बनाने के पीछे इसके निर्माता भूषण कुमार का एक जबर्दस्त कमिटमेंट भी रहा है।
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Batla House
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भूषण कुमार ने इस फिल्म का निर्माण करने के अपने कारणों का खुलासा करते हुए कहा, "सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस प्रोजेक्ट के साथ काम करने के पीछे रितेश शाह का इसके विषय को लेकर कमिटमेंट मुझे बहुत पसंद आया। उन्होंने इस पूरे मामले के बारे में गहरा रिसर्च किया और एक आकर्षक कहानी को सभी तथ्यों के साथ शानदार तरीके से पिरोया है।''
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भूषण कुमार बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि ''फिल्म एक धमाके के साथ शुरू होती है और इसके टेम्पो को पूरे समय बनाए रखती है। दूसरा, मैंने महसूस किया कि यह एक ऐसी कहानी है, जिसे आज की युवा पीढ़ी को बताने की आवश्यकता है, खासकर एनकाउंटर के बाद क्या हुआ इसे बताना जरूरी है।"
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बाटला हाउस के बाद भी भूषण कुमार हिंदी सिनेमा के दर्शकों की बदलती पसंद को ध्यान में रखते हुए ऐसी फिल्में ही बना रहे हैं, जिनमें मानवीयता की बात हो और जो भारतीय एहसासों को सही तरीके से उजादर करती हों। इनमें से एक फिल्म तो उनके पिता गुलशन कुमार की बायोपिक है, मुगल। दूसरी स्ट्रीट डांसर और तीसरी भुज - द प्राइड ऑफ इंडिया है।