भारतीय सिनेमा का इतिहास काफी सुनहरा रहा है। कई निर्देशकों से लेकर अभिनेताओं ने इसे और मजबूत ही किया है। ऐसा ही एक नाम बलराज साहनी हैं, जिनका सिनेमा को दिया योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। बलराज के बचपन का नाम 'युधिष्ठिर साहनी' था। बलराज साहनी का जन्म 1 मई 1913 को ब्रिटिश भारत के रावलपिंडी में हुआ था। उनकी गिनती बेहद प्रतिभाशाली अभिनेताओं में की जाती है। आइए इस मौके पर जानते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्सों के बारे में ....
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balraj sahni
- फोटो : सोशल मीडिया
फिल्मों के अलावा बलराज साहनी सामाजिक कार्यों से भी खूब जुड़े रहते थे। 1938 में उन्होंने महात्मा गांधी के साथ भी मिलकर काम किया था। इसके बाद वो बीबीसी लंदन हिंदी ज्वाइन करने इंग्लैंड चले गए। बलराज साहनी को एक्टिंग का शौक शुरू से ही था। जिसके लिए उन्होंने इंडियन पीपल थियेटर ज्वाइन किया।
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बलराज साहनी
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अपने किरदारों को जीवंत बनाने के लिए बलराज साहनी उस किरदार को असल में जीते थे। यही वजह थी उनके दमदार अभिनय की जिसे खूब सराहना मिलती है। इसी सिलसिले में एक बार वो जेल भी गए। दिलीप कुमार के कहने पर के. आसिफ ने बलराज को फिल्म हलचल में एक अहम रोल दिया। इस फिल्म में उन्होंने जेलर का किरदार निभाया। के. आसिफ जेलर के रोल को प्रामाणिक बनाना चाहते थे, इसके लिए वे कुछ नेताओं और फिर जेल प्रशासन से मिले। बलराज साहनी भी चाहते थे कि उनके रोल में जरा सा भी झोल न रहे, इसके लिए वो उत्साहित हो कर आसिफ के साथ आर्थर रोड जेल पहुंचे और जेल के अंदर के रहन-सहन को जाना।
किसे पता था कि फिल्म के किरदार चुनते वक्त बलराज साहनी को असल जिंदगी में भी जेल में रहना पड़ेगा। एक दिन खबर मिली की परेल से कम्युनिस्ट पार्टी का जुलूस निकलने वाला है। वामपंथी विचारधारा के समर्थक बलराज अपनी पत्नी के साथ उस जुलूस में शामिल हुए लेकिन इसी बीच हिंसा शुरू हो गई। कई लोगों के साथ बलराज साहनी को गिरफ्तार कर लिया गया।
एक दिन जेलर ने बलराज साहनी को बुलाया और कहा कि उन्हें कहीं देखा है। उस वक्त वहां के. आसिफ भी बैठे थे। के. आसिफ के कहने पर जेलर ने उन्हें जेल में रहकर शूटिंग करने की छूट दी। वो सुबह शूटिंग पर जाते और शाम को वापस जेल लौट आते। करीब 3 महीने तक उन्होंने जेल में रहकर फिल्म हलचल की शूटिंग की थी।