हिंदी सिनेमा की ब्लॉकबस्टर फिल्म शोले में खतरनाक डाकू गब्बर सिंह का किरदार निभाने वाले अभिनेता अमजद खान की आज पुण्यतिथि है। अभिनेता का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था, निधन के समय अमजद खान सिर्फ 51 साल के थे। 'गब्बर सिंह' फिल्म शोले का विलेन होने के बाद भी लोगों के लिए हीरो बन गए। चलिए आज उनकी पुण्यतिथि पर जानते हैं उनके बारे में कुछ रोचक बातें...
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अमजद खान
- फोटो : Social Media
शोले में अमजद खान द्वारा निभाया गया गब्बर का किरदार फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास में सबसे खतरनाक किरदारों में शुमार किया जाता है। हिंदी सिनेमा के पिछले सभी डकैतों से गब्बर अलग था, वह उस विलेन की तरह बिलकुल नहीं सोचता था, जिसकी आदत हिंदी सिनेमा के दर्शकों को थी।
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शोले
- फोटो : Social Media
गंदी कमीज, बढ़ी हुई दाढ़ी, खैनी चबाकर थूकता गब्बर उस खांचे में नहीं ढाला गया था, जिस खांचे में हिंदी सिनेमा के उस समय तक के विलेन गढे़ गए थे। गब्बर के बाद हिंदी सिनेमा के दर्शकों ने विलेन के नए नजरिए से देखना शुरू किया। हालांकि अमजद खान फिल्म 'शोले' में 'गब्बर सिंह' के किरदार के लिए पहली पसंद नहीं थे। इस किरदार के लिए अभिनेता डैनी को चुना गया था।
अमजद खान इससे पहले 1951 में आई 'नाजनीन' में बाल कलाकार के रूप में काम कर चुके थे। 17 साल की उम्र में 1957 में उन्होंने 'अब दिल्ली दूर नहीं' में भी काम किया था। 1973 में आई 'हिंदुस्तान की कसम' में भी वह पर्दे पर दिख चुके थे, लेकिन उन्होंने एक ऐसी फिल्म का इंतजार था, जो उन्हें बॉलीवुड में स्थापित कर सके। शोले ने न केवल अमजद खान को बॉलीवुड मे स्थापित किया, बल्कि 'गब्बर सिंह' के रूप में एक किरदार गढ़ा, जो बॉलीवुड के विलेन की कसौटी बन गया।
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अमजद खान, फिरोज खान, विनोद खन्ना
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
'कितने आदमी थे?', 'अब तेरा क्या होगा कालिया?', 'जो डर गया, समझो मर गया।' जैसे संवादों को अमजद खान ने नया आयाम दिया। 'शोले' के लिए अमजद खान को फिल्मफेयर पुरस्कारों की 'बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर' कैटेगरी में नामित किया गया था। हालांकि उन्हें अवॉर्ड नहीं मिला। अभिनेता अमजद चाय पीने के बहुत शौकीन थे। वह हर दिन तीस कप चाय पी जाते थे। अमजद खान ने शोले, कालिया, लावारिस, कुर्बानी, याराना समेत कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया था।