'यहां से पचास-पचास कोस दूर गांव में जब बच्चा रात को रोता है, तो मां कहती है बेटा सो जा नहीं तो गब्बर आ जाएगा...' फिल्म शोले का यह डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर रटा है। शोले में गब्बर सिंह का किरदार निभाकर चर्चा में आए अमजद खान लोगों के दिलो-दिमाग में हमेशा के लिए बस गए। गब्बर का रोल करने के बाद अभिनेता अमजद खान को लोग गब्बर ही कहने लगे थे। 12 नवंबर 1940 को पेशावर में जन्मे अमजद खान के जन्मदिन के मौके पर जानिए उनके जुड़े कुछ दिलचस्प किस्सों के बारे में-
2 of 4
अमजद खान
- फोटो : सोशल मीडिया
यूं तो अमजद खान ने अपने करियर में कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में काम किया है, लेकिन उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट की थी। वे पहली बार 1951 में आई फिल्म नाजनीन नजर आए थे। इसके बाद उन्होंने कुछ और फिल्मों में चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर काम किया। फिर कुछ सालों तक थिएटर में काम और 1973 में फिल्म हिंदुस्तान की कसम में लीड हीरो के तौर पर डेब्यू किया था। अमजद खान ने भले ही तमाम फिल्मों में काम किया हो, लेकिन शोले में उनका गब्बर का किरदार अमर हो गया। ठेठ देसी अंदाज में जब वह तंबाकू रगड़ते हुए डायलॉग बोलते थे तो हर कोई उनका फैन हो गया था
इसे भी पढ़ें- Pawan Kalyan: साउथ सुपरस्टार पवन कल्याण ने की पीएम मोदी से मुलाकात, 30 मिनट तक कई विषयों पर हुई चर्चा
3 of 4
अमजद खान
- फोटो : सोशल मीडिया
लेकिन आप जब ये जानेंगे कि अमजद खान को गब्बर सिंह जैसी डायलॉग डिलीवरी करने की प्रेरणा किससे मिली तो आप हैरान रह जाएंगे। गब्बर सिंह के डायलॉग डिलीवरी का जो अंदाज था, वो न तो फिल्म के डायरेक्टर ने बताया था और ना ही स्क्रिप्ट राइटर ने। अब सवाल ये उठता है कि आखिर अमजद ने ये अंदाज कहां से सीखा।
4 of 4
अमजद खान
- फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, अमजद खान के गांव में एक धोबी था। जो रोज सुबह- सुबह लोगों से इसी अंदाज में बात करता था। अमजद खान उसके स्टाइल से बहुत प्रभावित थे और बड़े गौर से उसे सुनते थे। जब उन्हें फिल्म शोल में गब्बर सिंह का रोल करने की चुनौती मिली तो उन्हें एक आइडिया सूझा। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में चर्चित विलेन के अंदाज कॉपी करने की बजाय धोबी वाले ठेठ अंदाज को आजमाने की ठान ली। उसके बाद तो रमेश सिप्पी भी अमजद खान की तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाए।