80 के दशक का जाना-पहचाना चेहरा रहीं रंजीता कौर को भला कौन नहीं जानता होगा। पहली ही फिल्म में ऋषि कपूर जैसे बड़े स्टार का साथ मिला तो बाद में राजश्री जैसे प्रतिष्ठित बैनर। लेकिन मिथुन के साथ अफेयर के किस्से और बढ़ते शोहरत को रंजीता संभाल नहीं पाई और उनका पीक पर पहुंचा करियर औंधे मुंह गिर गया।
रंजीता कौर ने 'लैला मजनू' और 'अंखियों के झरोखों से' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के जरिए अपने लिए एक अच्छा खासा वर्ग खड़ा किया। दो बड़ी हिट देने के बाद रंजीता सभी की पसंद बन गईं थीं। हर निर्माता-निर्देशक उन्हें अपनी फिल्म में लेना चाहता था। लेकिन एक ऐसा वक्त आया जब उनका करियर डूबने लगा।
वैसे तो रंजीता बहुत ज्यादा खूबसूरत नहीं थीं लेकिन पुणे फिल्म संस्थान से अभिनय की बारीकी ने उन्हें कामयाब अभिनेत्री बनाया। करियर के इसी मोड़ पर रंजीता ने मिथुन चक्रवर्ती के साथ 'तराना', 'सुरक्षा' जैसी और कई फिल्में की और बढ़ते शोहरत को रंजीता संभाल नहीं पाईं।
लगातार कई बेकार फिल्में साइन करने और फ्लॉप होने से रंजीता थोड़ी सी तुनकमिजाज और चिड़चिड़ी हो गईं। कहा तो ये भी जाता है कि उस वक्त रंजीता ने फिल्मों में बोल्ड सीन्स करने से मना कर दिया था जिसकी वजह से उनका करियर अन्य हीरोइनों के मुकाबले पिछड़ गया।
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रंजीता ने फिल्मों से संन्यास लेना ही बेहतर समझा और 90 के दशक में ही इंडस्ट्री छोड़ दी। हालांकि तकरीबन 15 सालों बाद साल 2005 में रंजीता ने 'अंजाने' फिल्म से बड़े पर्दे पर फिर से वापसी की लेकिन उनका जादू दर्शकों पर नहीं चल पाया। रंजीता को अहसास हो गया कि अब फिल्मों में उनका सिक्का नहीं जमने वाला है इसलिए कुछ और काम करने में ही भलाई है।