सलमान खान को इस अयोग्य ठहराए गए अधिकारी की जांच ने जेल में पहुंचाया है। जानिए कौन हैं ये अधिकारी। कांकणी हिरण शिकार मामले में सलमान खान अब जेल पहुंच चुके हैं, लेकिन इस मामले के जांच अधिकारी ललित बोरा को राजनीतिक दबाव से लेकर अभद्र व्यवहार और अयोग्य जैसे शब्दों से भी दो-चार होना पड़ा। वर्ष 1998 में जब सलमान पर हिरण शिकार के आरोप लगे, तब राजस्थान में कांग्रेस सरकार थी।
राज्य सरकार में सलमान की फिल्मी पर्दे की मां बीना काक मंत्री थीं। उस दौरान साक्ष्यों को मिटाने, जांच प्रभावित करने और वन विभाग के अफसरों द्वारा सलमान की सेवा करवाने जैसे आरोप भी लगे थे। इन हालातों में काले हिरण शिकार मामले में 7 अक्तूबर 1998 को वन विभाग के तत्कालीन डीएफओ एमएल सोनल ने तत्कालीन एसीएफ ललित बोरा को जांच सौंपी थी।
अब बोरा वन विभाग की नौकरी छोड़ चुके हैं और अब प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं। ललित बोरा ने शिकार में इस्तेमाल की गई जिप्सी दवा कारोबारी अरुण यादव के घर से बरामद की थी। इसके ड्राइवर हरीश दुलानी ने पूछताछ में कबूला कि सलमान और साथियों ने हिरणों का शिकार किया था। बाद में दुलानी की मानसिक स्थिति पर ही सवाल उठा दिए गए।
बोरा से जुड़े नजदीकी सूत्रों ने बताया कि उस दौरान सलमान और सैफ जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे।
गुस्से में सलमान ने बोरा पर फेंक दी थी कुर्सी
अदालत ने सलमान को चार दिन की रिमांड पर वन विभाग को सौंप दिया था। सूत्रों ने बताया कि बोरा ने तब कहा था कि एक अन्य डीएफओ सलमान को सिगरेट लाकर पिलाते थे। इस सबके बीच जब बोरा ने सलमान से सख्ती से पूछताछ की, तो गुस्से में सलमान ने कुर्सी उठाकर फेंक दी थी। बोरा ने केस फाइल बचाने के लिए उसे दबाकर रख दिया।
अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान सलमान के वकील ने कहा कि बोरा ने सलमान को रिमांड पर लेने से पहले कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाई। ये आरोप भी लगाया कि बोरा ने एफएसएल रिपोर्ट में हाथ से संशोधन किया। बचाव पक्ष ने कहा कि वन विभाग ने अयोग्य अधिकारी से मामले की जांच करवाई है।