अभिनेता आमिर खान जिस फिल्म से निर्माता आमिर खान बने वह फिल्म ‘लगान’ ही है। आमिर ने दिग्गज निर्माताओं आदित्य चोपड़ा और करण जौहर के मना करने के बावजूद ये फिल्म स्टार्ट टू फिनिश शूट की। सिंक साउंड में शूट की यानी सिनेमाघरों में कलाकारों की आवाजें वहीं हैं जो शूटिंग करते वक्त रिकॉर्ड की गईं। आमिर को फिल्म ‘लगान’ के 20 साल पूरे होने पर फिल्म से जुड़ी हर बात फिर याद आ रही है। वैसे याद करने लायक बात यहां ये भी है कि आमिर की अपनी मौजूदा पत्नी किरण राव से मुलाकात इसी फिल्म के सेट पर हुई लेकिन आमिर यहां मुंबई में फिल्म ‘लगान’ के 20 साल पूरे होने को लेकर जब मीडिया से रूबरू हुए तो उन्होंने तारीफें सबसे ज्यादा अपनी पहली पत्नी रीना दत्ता की ही कीं।
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लगान
- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
फिल्म ‘लगान’ के 20 साल पूरे होने का उत्साह तो आमिर के चेहरे पर दिखा ही लेकिन ज्यादा उत्साह से बातें उन्होंने अपनी पहली पत्नी रीना दत्ता के बारे में कीं। आमिर ने बताया कि कैसे फिल्ममेकिंग की कोई जानकारी न होने के बावजूद रीना ने ये सब अपने आप सीखा और फिल्म निर्माण का पूरा काम खुद संभाला। आमिर ने इस मौके पर रीना दत्ता की इस बात के लिए भी खूब तारीफ की कि उन्होंने फिल्म ‘लगान’ के बनने में पूरे समर्पण भाव से काम किया। वह कहते हैं, ‘मैं रीना के इस काम को पूरी उम्र नहीं भुला सकता कि बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के आकर उन्होंने इस जिम्मेदारी को इतनी खूबसूरती से संभाला और निभाया।’
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- फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई
आमिर ने सोमवार से अपनी फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ पर भी फिर से काम शुरू कर दिया है। उनके और रीना के बेटे जुनैद की बतौर हीरो पहली फिल्म ‘महाराजा’ की शूटिंग भी रविवार को शुरू हो चुकी है। फिल्म ‘लगान’ के बारे में आमिर ने ये भी कहा कि इस फिल्म को एक ही शेड्यूल में पूरा करने और इसे सिंक साउंड में शूट करने को फिल्म इंडस्ट्री में सारे लोग मेरा पागलपन ही समझते थे। फिल्म वितरक अनिल थडानी के घर पर हुई पार्टी का जिक्र करते हुए आमिर बताते हैं, ‘ये फिल्म ‘लगान’ की शूटिंग शुरू होने के कुछ ही हफ्ते पहले की बात है। पार्टी में आदि चोपड़ा और करण जौहर भी थे। दोनों मेरे अच्छे मित्र हैं और दोनों मेरे भले के लिए ही परेशान हो रहे थे। दोनों की यही चिंता थी कि तू पहली फिल्म बना रहा है। क्या बना रहा है ये भी पता नहीं। सिंक साउंड कर रहा है। एक ही शेड्यूल में फिल्म बना रहा है। कल को कुछ छूट गया तो दोबारा इसे ठीक करने का मौका भी नहीं मिलेगा।’
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आमिर कहते हैं कि सिंक साउंड के साथ फिल्म शूट करने का उनका मन फिल्म ‘लगान’ से भी पांच साल पहले से हो रहा था। वह कहते हैं, ‘मुझे समझ आने लगा था कि जिस भावों के साथ मैं शूटिंग करने के समय संवाद बोलता हूं, वे भाव दोबारा डबिंग के वक्त लाना बहुत मुश्किल होता था। मैं अपने निर्माताओं से इसकी बात करता था तो वे सुनते नहीं थे। तो जब मैं निर्माता बना तो मैंने ये काम किया। उसके बाद से मैंने जितनी फिल्में की, सबमें सिंक साउंड शूटिंग ही की और सारी फिल्में सिंगल शेड्यूल में ही कीं। इस फैसले ने मुझे इस बात का एहसास कराया कि मैं सही सोच रहा था। और, बस इसके बाद तो मेरा जीवन पूरी तरह बदल गया।’
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फिल्म ‘लगान’ को भारत की तरफ से ऑस्कर अवार्ड्स में भेजा गया था। फिल्म विदेशी भाषा की श्रेणी की अंतिम पांच फिल्मों में भी जगह बनाने में कामयाब रही। आमिर कहते हैं, ‘फिल्म ‘लगान’ को पुरस्कार न मिलने से मुझे निराशा हुई थी। मुझे तमाम लोगों ने बताया कि मैं ये करता या वो करता तो मुझे ऑस्कर मिल जाता। लेकिन, ऑस्कर की किसी कैटेगरी की अंतिम पांच फिल्मों में पहुंचना भी उपलब्धि है। ये पांचों फिल्में एक जैसी ही होती हैं। किन्हीं दो फिल्मो की हम तुलना वैसे भी नहीं कर सकते। आज हम फिल्म ‘लगान’ की तुलना फिल्म ‘दंगल’ से नहीं कर सकते। मेरा वैसे भी नियम रहा है कि पुरस्कारों को बहुत गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।’