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मैं खुद अपना सबसे बड़ा आलोचक हूंः आमिर
पंकज शुक्ल
Updated Sat, 24 Dec 2016 12:17 PM IST
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आमिर खान दो साल बाद बड़े परदे पर वापसी कर रहे हैं। हिंदी सिनेमा में वह पहले कलाकार हैं जिसने किरदार के हिसाब से शरीर को ढालने, एक बार में एक ही फिल्म करने और लोकेशन पर ही संवाद रिकॉर्ड करने की शुरुआत की। आमिर अपने सबसे बड़े आलोचक खुद हैं और दूसरों की कही बात का जल्दी बुरा नहीं मानते हैं। 'दंगल' की रिलीज पर पढ़िए आमिर खान के साथ अमर उजाला की विशेष बातचीत...
प्रश्न- जब भी आप कोई किरदार चुनते हैं तो आमतौर पर हिन्दी सिनेमा होता ये है कि कोई इतिहास का किरदार चुनता है या मायथोलॉजी चुनता है लेकिन जो लिविंग कैरेक्टर्स हैं, उन पर फिल्म बनाना बहुत ही चैलेजिंग माना जाता है। ऐसे में कितना चैलेंज रहता है आपको कि वो जो किरदार हम करने जा रहे हैं जो ऑलरेडी लिविंग है हमारे बीच में।
आमिर – चैलेंज तो हर किरदार में रहता है पहले तो मैं ये कह दूं कि चाहे वो फिक्शन हो या नॉन-फिक्शन हो, चैलेंज एक्टर के लिए रहता है। अगर आप नॉन-फिक्शन में कर रहे हैं जो वाकई में एक इंसान है या रहा है तो आपकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। आप एक इंसान के ऊपर कहानी बना रहे हैं मतलब उस इंसान को आप दोबारा जीवित कर रहे हैं। उसमें एक सच्चाई हो, एक एक्यूरेसी हो, ये जिम्मेदारी हम पर होती है।
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प्रश्न- जो भी किरदार आपने महावीर फोगट के पहले भी किए हैं, उतनी ही मेहनत हर किरदार में करते दिखते हैं चाहे गजनी हो, धूम हो, या सरफरोश हो, जो डेडिकेशन है एक्टिंग को लेकर, जो पैशन है इसमें इंपिरेशन कहा से मिलती है आपको?
आमिर– इसका जवाब देना मुश्किल इसलिये है कि मुझे खुद नहीं पता कि कहां से मिलती है। मुझे लगता है कि शायद मेरा नेचर ऐसा है कि मैं जो भी काम करता हूं मैं पूरे ध्यान से करता हूं, पूरे लगाव के साथ करता हूं। चाहे कोई फिल्म हो या कोई खेल हो या दो रोटी खाना खा रहा हूं तो मेरा ध्यान पूरा उस पर ही लगा रहता है। मैं हर चीज़ को इंज्वाय कर के करता हूं। तो वो शायद मेरा नेचर है। और एक बात वो है कि जब आप वो काम करते हैं जिसमें आपको दिलचस्पी हो तो ऑटोमैटिकली उसमें आपका पैशन उसमें निकलता है आपका जोश उसमें आता है। तो मुझे बहुत पसंद है फिल्म मेकिंग, कहानियों की दुनिया। हर वक्त मैं अलग किरदार निभाने की कोशिश करता हूं तो ये जो दुनिया है मुझे बहुत पसंद है क्योंकि मेरा दिल इसमें इतना है कि पैशन आ जाता है।
प्रश्न- थोड़ी देर पहले हम बात कर रहे थे आपके पढ़ाई छोड़ने के फैसले की। जब आपकी अम्मी ने डांटा कि बेटा पढ़ाई छोड़कर क्यों जा रहे हो फिल्मों में, तो आपने कहा कि नहीं पढ़ाई अब शुरू करनी है। तो ये जो आज का यूथ है, जो जेनरेशन हैं उसको आप बताये कि उस वक्त जब आपने फैसला लिया लाइफ का तो वो कितने कमिटमेंट का था और उसको पाने के लिये कितनी मेहनत की आपने फिर।
आमिर – जब मैंने फिल्मों में आना डिसाइड किया तो अम्मी, अब्बाजान खुश नहीं थे मेरे फैसले से हालांकि वह खुद फिल्म प्रोड्यूसर रह चुके हैं। 12वीं मैंने किया था और आगे की पढ़ाई ग्रेजुएशन नहीं करना चाह रहा था मैं, तो वह बड़े अपसेट हुए मुझसे। मैंने उनको समझाने की कोशिश कि कि मैं पढ़ाई छोड़ नहीं रहा हूं मैं पढ़ाई दरअसल शुरू कर रहा हूं। मैं आपको बताऊं कि जब मैं स्कूल में था, कॉलेज में था मेरी पढ़ाई में बिलकुल दिलचस्पी नहीं थी। स्पोर्ट्स में ज्यादा मेरा ध्यान था। फिल्म में फिर मेरा इंटरेस्ट बढ़ा तो स्कूल और कॉलेज के दौरान तो मैंने पढ़ाई मैंने बहुत कम की हालांकि वहां से निकलने के बाद मेरी पढ़ाई शुरू हुई है। केवल सिनेमा के बारे में ही नहीं, आज मैं फिजिक्स की बुक पढ़ता हूं। बायलॉजी की बुक्स पढ़ता हूं। एंथ्रोपोलॉजी की बुक्स पढ़ता हूं और हिस्ट्री की बुक्स पढ़ता हूं। हाल ही में मैं बुक पढ़ रहा हूं जिसका नाम है जीन। जिसमें जीन के बारे में बताया गया है कि कहां से ये इंसानो को समझ में आया कि जीन जैसी कोई चीज होती है। डीएनए, आरएनए क्या होता है?
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प्रश्न- जब भी आप कोई किरदार चुनते हैं तो आमतौर पर हिन्दी सिनेमा होता ये है कि कोई इतिहास का किरदार चुनता है या मायथोलॉजी चुनता है लेकिन जो लिविंग कैरेक्टर्स हैं, उन पर फिल्म बनाना बहुत ही चैलेजिंग माना जाता है। ऐसे में कितना चैलेंज रहता है आपको कि वो जो किरदार हम करने जा रहे हैं जो ऑलरेडी लिविंग है हमारे बीच में।
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आमिर – चैलेंज तो हर किरदार में रहता है पहले तो मैं ये कह दूं कि चाहे वो फिक्शन हो या नॉन-फिक्शन हो, चैलेंज एक्टर के लिए रहता है। अगर आप नॉन-फिक्शन में कर रहे हैं जो वाकई में एक इंसान है या रहा है तो आपकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। आप एक इंसान के ऊपर कहानी बना रहे हैं मतलब उस इंसान को आप दोबारा जीवित कर रहे हैं। उसमें एक सच्चाई हो, एक एक्यूरेसी हो, ये जिम्मेदारी हम पर होती है।
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प्रश्न- जो भी किरदार आपने महावीर फोगट के पहले भी किए हैं, उतनी ही मेहनत हर किरदार में करते दिखते हैं चाहे गजनी हो, धूम हो, या सरफरोश हो, जो डेडिकेशन है एक्टिंग को लेकर, जो पैशन है इसमें इंपिरेशन कहा से मिलती है आपको?
आमिर– इसका जवाब देना मुश्किल इसलिये है कि मुझे खुद नहीं पता कि कहां से मिलती है। मुझे लगता है कि शायद मेरा नेचर ऐसा है कि मैं जो भी काम करता हूं मैं पूरे ध्यान से करता हूं, पूरे लगाव के साथ करता हूं। चाहे कोई फिल्म हो या कोई खेल हो या दो रोटी खाना खा रहा हूं तो मेरा ध्यान पूरा उस पर ही लगा रहता है। मैं हर चीज़ को इंज्वाय कर के करता हूं। तो वो शायद मेरा नेचर है। और एक बात वो है कि जब आप वो काम करते हैं जिसमें आपको दिलचस्पी हो तो ऑटोमैटिकली उसमें आपका पैशन उसमें निकलता है आपका जोश उसमें आता है। तो मुझे बहुत पसंद है फिल्म मेकिंग, कहानियों की दुनिया। हर वक्त मैं अलग किरदार निभाने की कोशिश करता हूं तो ये जो दुनिया है मुझे बहुत पसंद है क्योंकि मेरा दिल इसमें इतना है कि पैशन आ जाता है।
प्रश्न- थोड़ी देर पहले हम बात कर रहे थे आपके पढ़ाई छोड़ने के फैसले की। जब आपकी अम्मी ने डांटा कि बेटा पढ़ाई छोड़कर क्यों जा रहे हो फिल्मों में, तो आपने कहा कि नहीं पढ़ाई अब शुरू करनी है। तो ये जो आज का यूथ है, जो जेनरेशन हैं उसको आप बताये कि उस वक्त जब आपने फैसला लिया लाइफ का तो वो कितने कमिटमेंट का था और उसको पाने के लिये कितनी मेहनत की आपने फिर।
आमिर – जब मैंने फिल्मों में आना डिसाइड किया तो अम्मी, अब्बाजान खुश नहीं थे मेरे फैसले से हालांकि वह खुद फिल्म प्रोड्यूसर रह चुके हैं। 12वीं मैंने किया था और आगे की पढ़ाई ग्रेजुएशन नहीं करना चाह रहा था मैं, तो वह बड़े अपसेट हुए मुझसे। मैंने उनको समझाने की कोशिश कि कि मैं पढ़ाई छोड़ नहीं रहा हूं मैं पढ़ाई दरअसल शुरू कर रहा हूं। मैं आपको बताऊं कि जब मैं स्कूल में था, कॉलेज में था मेरी पढ़ाई में बिलकुल दिलचस्पी नहीं थी। स्पोर्ट्स में ज्यादा मेरा ध्यान था। फिल्म में फिर मेरा इंटरेस्ट बढ़ा तो स्कूल और कॉलेज के दौरान तो मैंने पढ़ाई मैंने बहुत कम की हालांकि वहां से निकलने के बाद मेरी पढ़ाई शुरू हुई है। केवल सिनेमा के बारे में ही नहीं, आज मैं फिजिक्स की बुक पढ़ता हूं। बायलॉजी की बुक्स पढ़ता हूं। एंथ्रोपोलॉजी की बुक्स पढ़ता हूं और हिस्ट्री की बुक्स पढ़ता हूं। हाल ही में मैं बुक पढ़ रहा हूं जिसका नाम है जीन। जिसमें जीन के बारे में बताया गया है कि कहां से ये इंसानो को समझ में आया कि जीन जैसी कोई चीज होती है। डीएनए, आरएनए क्या होता है?
मैं कभी हर्ट फील नहीं करता
प्रश्न- जब आप ने शुरुआत की होगी तब लोग आलोचना करते होंगे कि यार ये क्या एक्टिंग करता है? अब कोई आलोचना करता है, आप के बारे में कोई निगेटिव कमेंट करता है तो आप का रिएक्शन क्या होता है?
आमिर– जब मैं कोई काम करता हूं सबसे बड़ा क्रिटिक मैं खुद अपने आप का होता हूं, तो जब मैं अपना काम देखता हूं मुझे बड़ी कोफ्त होती है मैंने ये शॉट ठीक नहीं दिया। ये सीन बेहतर कर सकता था मैं। तो जब मुझे कोई क्रिटिसाइज करता है तो मैं बड़े ध्यान से सुनता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि इससे मुझे सीखने को मिलेगा।
प्रश्न- मैं नाम नहीं लेना चाहूंगा पर मेरे ही एक इंटरव्यू में एक एक्टर ने ये बयान दिया था काफी पहले आप के बारे में कि कोई भी बस लंबे बाल करके एक्टर नहीं बन जाता है, इस तरह की बातें जब सुनते हैं तो कितना हर्ट फील करते है आप?
आमिर– नहीं, मैं हर्ट फील नहीं करता हूं। मैं हर्ट इसलिए फील नहीं करता हूं कि अगर बात सच है तो सच है उसमें हर्ट क्या होना? अगर आप में कोई कमी है कोई खराबी है तो कोई सच कह रहा आप से तो आप उससे सीखिए, अपने आप को बदलिए अपने आप को और बेहतर बनाइए तो उसमें बुरा लगने की क्या बात है। और अगर वो बात जो कह रहा है, सही नहीं है तो फिर बुरा लगने की कोई बात ही नहीं है। क्रिटिसिज्म को मैं पॉजिटिव तरीके में लेता हूं और मैं टटोलने की कोशिश करता हूं कि वाकई में ये सज्जन जो कह रहे है वो सही कह रहे हैं इससे मुझे सिखने का मौका मिल रहा है।
प्रश्न- अगर आप की जो फिल्में हैं शुरू से लेकर अभी तक की, आपको एक चांस मिले कि मैं ये वाली फिल्म एक बार फिर से बनना चाहता हूं तो कौन सी फिल्म सेलेक्ट करेंगे?
आमिर- मैं तो हर फिल्म दोबारा बनाना चाहता हूं क्योंकि जब भी मैं अपनी फिल्में देखता हूं, जब बन रही उस वक्त की बात नहीं कर रहा हूं मैं, लेकिन एक दो साल के बाद जब मैं अपनी कोई पुरानी फिल्म देखता हूं तो मुझे लगता है यार ये तो मैं बहुत बेहतर कर सकता था ये चीज। जो मैंने किया हुआ है अब मैं दोबारा करना चाहूंगा। दोबारा तो खैर मौका मिलता नहीं है लेकिन मन में वो बात आती है कि काश मैं ये दोबारा कर सकता। अब मैं बेहतर कर पाऊंगा।
आमिर– जब मैं कोई काम करता हूं सबसे बड़ा क्रिटिक मैं खुद अपने आप का होता हूं, तो जब मैं अपना काम देखता हूं मुझे बड़ी कोफ्त होती है मैंने ये शॉट ठीक नहीं दिया। ये सीन बेहतर कर सकता था मैं। तो जब मुझे कोई क्रिटिसाइज करता है तो मैं बड़े ध्यान से सुनता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि इससे मुझे सीखने को मिलेगा।
प्रश्न- मैं नाम नहीं लेना चाहूंगा पर मेरे ही एक इंटरव्यू में एक एक्टर ने ये बयान दिया था काफी पहले आप के बारे में कि कोई भी बस लंबे बाल करके एक्टर नहीं बन जाता है, इस तरह की बातें जब सुनते हैं तो कितना हर्ट फील करते है आप?
आमिर– नहीं, मैं हर्ट फील नहीं करता हूं। मैं हर्ट इसलिए फील नहीं करता हूं कि अगर बात सच है तो सच है उसमें हर्ट क्या होना? अगर आप में कोई कमी है कोई खराबी है तो कोई सच कह रहा आप से तो आप उससे सीखिए, अपने आप को बदलिए अपने आप को और बेहतर बनाइए तो उसमें बुरा लगने की क्या बात है। और अगर वो बात जो कह रहा है, सही नहीं है तो फिर बुरा लगने की कोई बात ही नहीं है। क्रिटिसिज्म को मैं पॉजिटिव तरीके में लेता हूं और मैं टटोलने की कोशिश करता हूं कि वाकई में ये सज्जन जो कह रहे है वो सही कह रहे हैं इससे मुझे सिखने का मौका मिल रहा है।
प्रश्न- अगर आप की जो फिल्में हैं शुरू से लेकर अभी तक की, आपको एक चांस मिले कि मैं ये वाली फिल्म एक बार फिर से बनना चाहता हूं तो कौन सी फिल्म सेलेक्ट करेंगे?
आमिर- मैं तो हर फिल्म दोबारा बनाना चाहता हूं क्योंकि जब भी मैं अपनी फिल्में देखता हूं, जब बन रही उस वक्त की बात नहीं कर रहा हूं मैं, लेकिन एक दो साल के बाद जब मैं अपनी कोई पुरानी फिल्म देखता हूं तो मुझे लगता है यार ये तो मैं बहुत बेहतर कर सकता था ये चीज। जो मैंने किया हुआ है अब मैं दोबारा करना चाहूंगा। दोबारा तो खैर मौका मिलता नहीं है लेकिन मन में वो बात आती है कि काश मैं ये दोबारा कर सकता। अब मैं बेहतर कर पाऊंगा।
माइथोलॉजिकल फिल्म बनाने से डरता हूं
प्रश्न- इन दिनों मीडिया का पूरा ध्यान सूचना देने पर कम सुर्खियां बनाने पर ज्यादा रहा है, इससे आप को दिक्कतें आती हैं?
आमिर– देखिए, मैं तो ये कहूंगा कि न सिर्फ मीडिया बल्कि हम जितने भी लोग हैं समाज में हैं, और अलग-अलग क्षेत्र में हम काम कर रहे है। जो इंसान मीडिया में होता है वह भी इसी समाज का है वो कोई अलहदा समाज से नहीं से आया है किसी और गोले नहीं आया है। तो जो लेवल ऑफ इंट्रीगिटी हमारे समाज में है जो सोशल फैब्रिक जितना मजबूत या कमजोर है वो फिर आप को हर जगह नजर आएगा, चाहे वो मीडिया हो, चाहे वो फिल्म में हो, चाहे वो पॉलिटिक्स में हो चाहे वो एडमिनिस्ट्रेशन में हो, चाहे वो टीचिंग प्रोफेशन में हो, कोई भी प्रोफेशन में आप ले ले तो जब सोशल फैब्रिक हमारा मजबूत होगा तो ये सारी चीजे मजबूत होंगी।
प्रश्न- पढ़ाई की जैसे आपने बात की कि आप जैसे नई-नई किताबे पढ़ते हैं, नई जानकारी जुटाने की कोशिश करते हैं तो जो सबसे बड़ा माइथोलॉजी का ग्रंथ है, हिंदुस्तान में पढ़ा जाता है रामचरितमानस हो या महाभारत हो। महाभारत को लेकर आप ने कई बार बोला है कि ये आप का प्रिय ग्रंथ है उसको आपने काफी पढ़ा भी है। कब कोशिश करेंगे आप महाभारत बनाने की?
आमिर– मैं रामायण भी पढ़ चुका हूं कई दफा और महाभारत भी कई दफा पढ़ चुका हूं और यकीनन मेरे दिल में बहुत खास जगह है इन दोनों के लिए। मुझमें ये इच्छा है कि महाभारत बनाऊं या उसका एक हिस्सा बन पाऊ क्योंकि महाभारत ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। बहुत कुछ मुझे सीखने को मिला है और बहुत से मेरे जब्बातों को छुआ है महाभारत ने। तो मेरी इच्छा है कि मैं इसको बना पाऊ लेकिन फिर मैं डरता हूं कि महाभारत इतनी विशाल चीज है, ठीक से बना भी पाऊंगा क्या? मैं खुद डरता हूं कि इसके बारे में कदम बढ़ाने से क्योंकि उसकी स्क्रिप्ट लिखने में ही पांच साल चले जाएंगे। फिर उसको शूट करने में वक्त लगेगा। ये इतनी विशाल एपिक है, पता नहीं बना पाऊंगा कि नहीं। इच्छा तो है मेरे मन में। बहुत इंस्पायर होता हूं लेकिन डरता भी हूं लेकिन अच्छा है डर से भी कुछ अच्छी चीज निकलती है।
(यह पूरा वीडियो इंटरव्यू आप रविवार रात 8 बजे www.amarujala.com/live-tv) पर देख सकते हैं)
आमिर– देखिए, मैं तो ये कहूंगा कि न सिर्फ मीडिया बल्कि हम जितने भी लोग हैं समाज में हैं, और अलग-अलग क्षेत्र में हम काम कर रहे है। जो इंसान मीडिया में होता है वह भी इसी समाज का है वो कोई अलहदा समाज से नहीं से आया है किसी और गोले नहीं आया है। तो जो लेवल ऑफ इंट्रीगिटी हमारे समाज में है जो सोशल फैब्रिक जितना मजबूत या कमजोर है वो फिर आप को हर जगह नजर आएगा, चाहे वो मीडिया हो, चाहे वो फिल्म में हो, चाहे वो पॉलिटिक्स में हो चाहे वो एडमिनिस्ट्रेशन में हो, चाहे वो टीचिंग प्रोफेशन में हो, कोई भी प्रोफेशन में आप ले ले तो जब सोशल फैब्रिक हमारा मजबूत होगा तो ये सारी चीजे मजबूत होंगी।
प्रश्न- पढ़ाई की जैसे आपने बात की कि आप जैसे नई-नई किताबे पढ़ते हैं, नई जानकारी जुटाने की कोशिश करते हैं तो जो सबसे बड़ा माइथोलॉजी का ग्रंथ है, हिंदुस्तान में पढ़ा जाता है रामचरितमानस हो या महाभारत हो। महाभारत को लेकर आप ने कई बार बोला है कि ये आप का प्रिय ग्रंथ है उसको आपने काफी पढ़ा भी है। कब कोशिश करेंगे आप महाभारत बनाने की?
आमिर– मैं रामायण भी पढ़ चुका हूं कई दफा और महाभारत भी कई दफा पढ़ चुका हूं और यकीनन मेरे दिल में बहुत खास जगह है इन दोनों के लिए। मुझमें ये इच्छा है कि महाभारत बनाऊं या उसका एक हिस्सा बन पाऊ क्योंकि महाभारत ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। बहुत कुछ मुझे सीखने को मिला है और बहुत से मेरे जब्बातों को छुआ है महाभारत ने। तो मेरी इच्छा है कि मैं इसको बना पाऊ लेकिन फिर मैं डरता हूं कि महाभारत इतनी विशाल चीज है, ठीक से बना भी पाऊंगा क्या? मैं खुद डरता हूं कि इसके बारे में कदम बढ़ाने से क्योंकि उसकी स्क्रिप्ट लिखने में ही पांच साल चले जाएंगे। फिर उसको शूट करने में वक्त लगेगा। ये इतनी विशाल एपिक है, पता नहीं बना पाऊंगा कि नहीं। इच्छा तो है मेरे मन में। बहुत इंस्पायर होता हूं लेकिन डरता भी हूं लेकिन अच्छा है डर से भी कुछ अच्छी चीज निकलती है।
(यह पूरा वीडियो इंटरव्यू आप रविवार रात 8 बजे www.amarujala.com/live-tv) पर देख सकते हैं)