बॉलीवुड में गीतकार और संगीतकार की कमी नही है बल्कि यहां ऐसे ऐसे हीरे हैं जिनकी आवाज और संगीत कानों में पड़ते ही सुनने वाला झूमने लगता है। हालांकि एक आवाज ऐसी भी है जो सीधे दिल तक पहुंचती है और जिसके संगीत मन को शांति पहुंचा देते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं संगीतकार ए आर रहमान की जिन्होंने देश से लेकर विदेश तक भारतीय संगीत का लोहा मनवाया है। 6 जनवरी को ए आर रहमान का 52वां जन्मदिन है। तो चलिए उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें।
ए आर रहमान ने बॉलीवुड को सिर्फ अपनी आवाज और संगीत ही नहीं बल्कि अपना दिल भी दिया है। संगीत के प्रति ए आर रहमान का समर्पण कुछ ऐसा है कि सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी उनके लाखों फैन हैं। उनकी प्रतिभा का इससे बड़ा और क्या प्रमाण होगा कि रहमान को इंटरनेशनल अवॉर्ड के साथ दुनिया के सबसे प्रसिद्ध ऑस्कर अवॉर्ड से भी नवाजा गया है।
3 of 6
ए आर रहमान
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
6 जनवरी 1966 में चेन्नई में जन्में ए आर रहमान का पूरा नाम अल्लाह रक्खा रहमान है। हालांकि उनका असली नाम 'दिलीप कुमार' था जो कि उन्हें पसंद नहीं था। रहमान हमेशा से चाहते थे कि उनका ये नाम बदल दिया जाए, लेकिन उन्हें इसका मौका ही नहीं मिल रहा था। अपनी आवाज से लोगों के दिलों में बस जाने वाले रहमान को संगीत अपने पिता से विरासत में मिला है। उनके पिता भी संगीतकार थे। हालांकि रहमान जब 9 साल के थे तभी उनके पिता का निधन हो गया था।
4 of 6
a r rahman
- फोटो : twitter
पिता के जाते ही रहमान के घर में गरीबी आ गई थी। यहां तक कि घर में रखे वाद्ययंत्र तक बेचने पड़े थे। हालांकि रहमान की मां को सूफी संत पीर करीमुल्लाह पर पूरा भरोसा था। हिंदू धर्म में भी वो बहुत विश्वास रखती थीं। रहमान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि पिता के गुजर जाने के करीब 10 साल बाद वो कादरी साहब से मिलने पहुंचे थे। उनकी तबियत खराब थी। उस दौरान उनकी मां ने कादरी साहब की बहुत सेवा की थी।
आगे रहमान ने कहा कि, 'मुझे समझ आ गया था कि आगे बढ़ने के लिए एक रास्ता चुनना है और वो है सूफिज्म का रास्ता'। संगीत उनके लहू में था और इसलिए उन्होंने सूफी इस्लाम को अपनाने का फैसला कर लिया। इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक गाने गाए और संगीत दिया जिसने हर किसी को उनका दीवाना बना दिया।