साल 1971 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म 'आनंद' को आज 50 साल पूरे हो गए हैं। फिल्म में दिवंगत अभिनेता राजेश खन्ना और महानायक अमिताभ बच्चन ने लीड रोल में काम किया था। फिल्म 'आनंद' बेहद भावुक कर देने वाली फिल्म थी। कैंसर के मरीज की जिंदगी पर आधारित इस फिल्म को जिसने भी देखा होगा, वो रोया जरूर होगा। इस फिल्म को देखते हुए दर्शक के मन में ये ख्याल एक बार जरूर आया होगा कि काश आनंद की मौत ना हो। ये फिल्म जितनी बेहतरीन है, इसके गाने भी उतने ही शानदार हैं। उस वक्त राजेश खन्ना फिल्मी जगत के सुपरस्टार थे और फिल्म में उनका होना ही फिल्म हिट होना माना जाता था। लेकिन क्या आपको पता है कि इस फिल्म के लिए राजेश खन्ना पहली पसंद नहीं थे।
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आनंद फिल्म
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फिल्म 'आनंद' का निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था और वो अपनी फिल्म के लिए अभिनेता की तलाश कर रहे थे। उन्होंने फिल्म की कहानी सबसे पहले अभिनेता धर्मेंद्र को सुनाई थी। फिल्म की कहानी सुनकर धर्मेंद्र बड़े खुश हुए और उन्होंने कहा कि ये फिल्म तो मैं ही करूंगा।
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फिल्म आनंद का एक सीन
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कुछ दिनों बाद अखबार में छपा कि फिल्म के हीरो राजेश खन्ना होंगे। फिर क्या था धर्मेन्द्र ने जमकर शराब पी और फिर देर रात ऋषिकेश दा को कॉल किया और कहा कि आप मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं? ऋषि उन्हें शांति से समझाते रहे और कहते रहे कि हम सुबह बात करेंगे, लेकिन धर्मेंद्र थे कि लगातार अपनी बात दोहराए जा रहे थे।
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फिल्म आनंद
- फोटो : twitter
तो वहीं उधर जब राजेश खन्ना को पता चला कि ये फिल्म बड़े-बड़े एक्टर्स के पास होकर उनके पास आई है। तो वो काफी खुश हुए और वो ऋषिकेश दा के पास पहुंचे और उनसे कहा कि मैं फिल्म करने के लिए तैयार हूं। तब ऋषिकेश दा ने उनसे कहा अगर आपको मेरे साथ काम करना है तो मेरी तीन शर्तें माननी होंगी। टाइम पर आना होगा। अधिक डेट्स देनी होंगी और तीसरी शर्त ये कि 1 लाख की फीस में ही काम करना होगा। राजेश बिना कुछ कहे उनकी सभी शर्तों को फौरन मान गए। राजेश खन्ना उन दिनों 8 लाख रुपये फीस लेते थे, लेकिन इस फिल्म के लिए उन्होंने सिर्फ 1 लाख रुपये फीस ली थी।
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फिल्म आनंद का एक सीन
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई टीम
फिल्म 'आनंद' में आनंद सहगल (राजेश खन्ना) अपने प्रिय दोस्त डॉक्टर भास्कर बनर्जी (अमिताभ बच्चन) को 'बाबू मोशाय' कहकर संबोधित किया करते थे। कहा जाता है कि यह शब्द राजकपूर ने दिया था और राजकपूर ऋषिकेश दा को बाबू मोशाय कहा करते थे।