प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में 100 मिनट का लंबा भाषण दिया। पीएम मोदी ने विपक्ष को चुप कराने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री तक का जिक्र किया। पर अपने भाषण में उन्होंने एक और महान पुरुष का जिक्र किया- भूपेंद्र कुमार दत्ता।
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कौन हैं भूपेंद्र कुमार दत्ता? संसद में पीएम मोदी ने इसलिए किया जिक्र...
Fri, 07 Feb 2020 11:27 AM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Fri, 07 Feb 2020 11:27 AM IST
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लोकसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : ANI
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लोकसभा में पीएम नरेंद्र मोदी
- फोटो : BJP Twitter
पीएम मोदी ने कहा...
- लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूपेंद्र कुमार दत्ता का एक किस्सा सुनाया। संसद में पीएम मोदी ने बताया कि भूपेंद्र कुमार दत्ता ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य थे।
- स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने 23 साल जेल में बिताए थे।
- वो एक ऐसे महान पुरुष थे, जिन्होंने 78 दिनों तक जेल में भूख हड़ताल की। इसकी के साथ उनके नाम पर ये रिकॉर्ड कायम हो गया।
- जब विभाजन(बंटवारा) हुआ था तब वे पाकिस्तान में ही रुक गए। दत्ता वहां के संविधान सभा के सदस्य भी थे। जब संविधान का काम चल रहा था (शुरुआती दौर) तो भूपेंद्र कुमार दत्ता ने अल्पसंख्यकों के दर्द को सबके साथ सांझा किया था।
कौन थे भूपेंद्र कुमार दत्ता?
Bhupendra Kumar Dutta
- फोटो : wikipedia
- भूपेंद्र दत्ता का जन्म 8 अक्टूबर 1892 को जसोर के ठाकुरपुर गांव (बांग्लादेश) में हुआ था।
- वे जीवन भर अविवाहित रहे। यह निर्णय उन्होंने बचपन में रामायण की एक कथा पढ़कर लिया।
- जब वे अनुशीलन समिति में शामिल हुए तभी से उनका अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष शुरू हो गया था।
क्या थी अनुशीलन समिति?
- अनुशीलन समिति साल 1902 में बनाई गई। इसका नेतृत्व ए ओ ह्यूम कर रहे थे।
- इस समिति को बनाने का उद्देश्य था युवाओं को इकट्ठा कर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के लिए प्रेरित करना।
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नरेद्र मोदी
- फोटो : ANI
- साल 1947 में आजादी के बाद वे पाकिस्तान में ही रुक गए। वे वहां के पहले एमएलए (विधान सभा के सदस्य- Member of the Legislative Assembly) बने उसके बाद एमपी (Member of Parliament) भी बने।
- साल 1962 में वे भारत आ गए। भारत आने के पीछे कारण था 1958 में पाकिस्तान में सेना का शासन लागू होना।
- 29 दिसंबर 1979 को उनका निधन कोलकाता में हुआ।
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