Career Mentors: बोर्ड परीक्षाओं और सीयूईटी के परिणामों के बाद बहुत से छात्र ऐसे होंगे, जिन्होंने अपने लिए सही विकल्प का चयन कर लिया होगा। इसके विपरीत कई छात्र ऐसे भी होंगे, जो अभी भी अपने कॅरिअर और कोर्स को लेकर असमंजस में होंगे। चाहे छात्र हो या कोई पेशेवर, जिंदगी के किसी न किसी पड़ाव पर कॅरिअर काउंसलिंग या यूं कह लें कि कैरिअर कोचिंग की जरूरत पड़ती ही है।
Career Mentors: छात्र हों या प्रोफेशनल, इन चार करियर गाइड को कभी न भूलें, बन सकते हैं सफलता की कुंजी
Career Coaching: चाहे आप कॉलेज के छात्र हों या एक अनुभवी पेशेवर, करियर की राह में ऐसे मौके जरूर आते हैं जब सही मार्गदर्शन की ज़रूरत पड़ती है। ऐसे में कुछ खास प्रशिक्षक या करियर मेंटर्स आपकी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन्हें भूलना शायद आपकी सबसे बड़ी चूक हो सकती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शुरुआत खुद से करें
आपका सबसे पहला कोच आप खुद हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि आपके करिअर का चुनाव आपसे ही शुरू होता है। आपका व्यक्तित्व, शौक आपके रुझान ही आपके कॅरिअर चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बस जरूरत है सही समय पर अपनी रुचियों का पता लगाने की।
उदाहरण के लिए आपको सही विकल्प समझ नहीं आ रहा कि आपको आगे क्या करना चाहिए, तो सबसे सही तरीका यह है कि आपको जितने भी कॅरिअर विकल्पों के बारे में पता है उनकी एक सूची बना लें। हर विकल्प की अच्छे से जांच-पड़ताल करें। इससे आपको आपकी रुचि से मेल खाता कोई न कोई विकल्प अवश्य मिल जाएगा। आगे कोशिश करें कि इन सभी विकल्पों पर आपकी अच्छी समझ हो।
अभिभावक की भूमिका
आपके दूसरे कोच आपके अभिभावक यानी माता-पिता हैं। आपने खुद से जिन विकल्पों का चयन किया है उनके बारे में अपने माता-पित्ता से बात करें और सलाह लें। यदि उनसे जुड़ा कोई व्यक्ति उस क्षेत्र का जानकार है, तो उनसे बातचीत करके जानने की कोशिश करें कि उस क्षेत्र में क्या संभावनाएं हैं।
उनसे यह भी पूछे कि आपके लिए उस विकल्प का चयन करना किस हद तक सही है। इससे आपके पास पहले से मौजूद विकल्पों में से और सटीक विकल्प तलाशने में मदद मिलती है।
बतौर शिक्षक का दायित्व
अब आपको अपने लक्ष्य के अनुसार खुद के कौशल को निखारना होगा। इसमें आपके तीसरे कोच यानी आपके शिक्षक का दायित्व बढ़ जाता है। आपके अध्यापक ही आपको सही तरीके से बता सकते हैं कि आप अपने लक्ष्य तक किस तरह से पहुंच सकते हैं।
इसके अलावा, आपसे कहां चूक हो रही है और सुधार की कितनी गुंजाइश है। वे इस बारे में भी आपका मार्गदर्शन करते हैं कि 11वीं और 12वीं में अच्छे परिणाम लाने के लिए किस हद तक और कैसे मेहनत करनी है।
दोस्तों को न करें नजरअंदाज
आपका चौथा कोच आपके अपने ही दोस्त होते हैं। बस आपको अपने लिए सही दोस्त का चुनाव करना होगा। इसके लिए आप कुछ ऐसे दोस्त बनाएं, जिनकी रुचि, शौक, कॅरिअर या लक्ष्य आपसे मेल खाते हों। ऐसे में आपके दोस्त बेहतरीन कोच की भूमिका निभा सकते हैं।
कमेंट
कमेंट X