कहते हैं किसी भी नई शुरुआत के लिए कभी देर नहीं होती। और कोशिशें कभी न कभी कामयाबी की बुलंदियों तक जरूर पहुंचाती हैं। ये बात अजय बहादुर सिंह पर बिल्कुल सटीक बैठती है। शायद आप इन्हें अब तक नहीं जानते हों। तो हम आपको इनके बारे में बता रहे हैं। क्योंकि इनकी कहानी हर किसी को आशावादी बना सकती है। अब तो बॉलीवुड एक्टर ऋतिक रोशन ने भी सोशल मीडिया पर इनकी तारीफ की है। आगे की स्लाइड्स में जानें अजय की कहानी और देखें तस्वीरें।
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अजय बहादुर सिंह
- फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
झारखंड के देवघर में 1972 में जन्मे अजय बहादुर सिंह का सपना डॉक्टर बनने का था। 1990 में वह पटना (बिहार) में रहकर जब एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, तब उन्हें अपने पिता की किडनी की बीमारी का पता चला। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उनके परिवार को पूरी संपत्ति बेचनी पड़ गई। इसके अलावा दोस्तों और रिश्तेदारों से भी मदद ली और पिता का इलाज कराया।
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एक अवॉर्ड पाते अजय बहादुर सिंह
- फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
घर के बड़े बेटे होने के कारण परिवार की जिम्मेदारी भी अजय पर आ गई। उन्होंने अपनी पढ़ाई और पिता के ईलाज के खर्चों के लिए ट्यूशन देना शुरू किया। जब इससे भी काम नहीं चला, तो उन्होंने देवघर के श्रावणी मेले में चाय और शरबत का स्टॉल लगाया।
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अजय बहादुर सिंह और उनके स्टूडेंट्स सुपर 30 के आनंद कुमार के साथ
- फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
मार्केटिंग का थोड़ा अनुभव लेने के बाद अजय ने घर-घर जाकर सोडा बनाने वाली मशीन बेचने का काम शुरू किया। अब तक अजय किसी तरह अपनी पढ़ाई और पिता का ईलाज दोनों जारी रख पा रहे थे। लेकिन ईलाज के लिए बार-बार चेन्नई आने-जाने का खर्च नहीं जुट पा रहा था। इस कारण अजय को अपनी मेडिकल की तैयारी बीच में ही छोड़नी पड़ी। हालांकि उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की।
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सुपर 30 के आनंदर कुमार और उनके भाई के साथ अजय बहादुर सिंह
- फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
अपनी पढ़ाई छोड़ने के बाद अजय ने खाली हाथ बैठ कर अपनी किस्मत को नहीं कोसा। बल्कि लगातार ट्यूशन देना जारी रखा। 1996 में पटना में एक कमरे में कोचिंग चलाकर बैंकिंग, रेलवे, एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में उम्मीदवारों की मदद की। एक साल में ही यह कोचिंग काफी अच्छा चला और अजय की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी।
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