सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi - Chief Justice of India) 17 नवंबर 2019 को सेवानिवृत्त हो गए। 15 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में उनके कार्य का आखिरी दिन था। सीजेआई गोगोई ने 3 अक्तूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद ग्रहण किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में 23 अप्रैल 2012 को नियुक्त हुए थे। तब से अब तक जस्टिस रंजन गोगोई ने अयोध्या मामले समेत कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले दिए हैं, जिसके लिए देश उन्हें हमेशा याद करेगा। वे कड़े और कई बार आश्चर्यचकित कर देने वाले फैसले लेने के लिए भी जाने जाते हैं।
अयोध्या ही नहीं, इन बड़े फैसलों के लिए भी याद किए जाएंगे सीजेआई गोगोई, हुए रिटायर
- आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई
- 15 नवंबर 2019 था सुप्रीम कोर्ट में कामकाज का आखिरी दिन
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सीजेआई रंजन गोगोई
- जस्टिस रंजन गोगोई का जन्म 18 नवंबर 1954 को हुआ था।
- वह देश के 46वें सीजेआई बने। उन्होंने 1978 में बार काउंसिल ज्वाइन की थी।
- जस्टिस गोगोई ने अपने करियर की शुरुआत गुवाहाटी हाईकोर्ट से की। 2001 में वहां जज बने थे।
- 2010 में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में जज बने। फिर 23 अप्रैल 2012 को सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए।
- वह 3 अक्तूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने थे। 17 नवंबर 2019 को इस पद से सेवानिवृत्त होंगे।
- अयोध्या ममाले के अलावा, एनआरसी व जम्मू-कश्मीर मामले जैसे कई ऐतिहासिक मामलों की सुनवाई की है।
आगे पढ़ें, सीजेआई गोगोई के ऐतिहासिक फैसले
1. अयोध्या मामला
सीजेआई रंजन गोगोई के करियर का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला अयोध्या मामले में रहा। उनकी अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने राम मंदिर और बाबरी मस्जिद की विवादित जमीन के उस मामले पर अंतिम फैसला सुनाया जो सैकड़ों सालों से चला आ रहा था। यह फैसला 9 नवंबर 2019 को आया।
2. आरटीआई दायरे में सीजेआई कार्यालय
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय अब सूचना का अधिकार कानून (RTI Act) के दायरे में आएगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बुधवार, 13 नवंबर 2019 को ये फैसला सुनाया गया। कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर सार्वजनिक कार्यालय है, इसलिए यह आरटीआई कानून के दायरे में आएगा। यह बड़ा फैसला भी सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने सुनाया। यह मामला भी करीब नौ साल तक चला।
3. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC)
असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने के मामले में भी पूरे देश में कई विवाद हुए। लेकिन सीजेआई गोगोई का फैसला अडिग रहा। उन्होंने निश्चित किया कि तय समयसीमा में एनआरसी को लागू किया जा सके, ताकि गैरकानूनी तरीके से असम में रह रहे लोगों की पहचान की जा सके। गोगोई का जन्म असम के डिब्रूगढ़ में ही हुआ है।