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कुछ रुपयों से 100 करोड़ टर्नओवर तक का सफर, सुनकर रह जाएंगे हैरान
Tue, 05 Feb 2019 06:37 PM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Tue, 05 Feb 2019 06:37 PM IST
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‘हिम्मत’। हर सफलता के पीछे यह शब्द जरूर होता है। यदि आपने कुछ नया करने की हिम्मत ही नहीं दिखाई तो जिंदगी ढर्रे पर चलती है। शहर के युवा व्यवसायी रौनक टंडन की सफलता के पीछे भी उनकी ‘हिम्मत’ ही ज्यादा है। इन्होंने खुद का बिजनेस स्थापित करने के लिए अच्छी खासी नौकरी छोड़ दी। और अब महज तीन साल में इन्होंने 50 लाख रुपये से शुरू किए काम को सालाना 100 करोड़ रुपये के टर्नओवर में तब्दील कर दिया है। शहर के युवाओं के लिए इन्होंने सफलता की नई कहानी लिखी है।
रौनक टंडन कानपुर, आर्यनगर में रहते हैं। इनके पिता एससी टंडन भारतीय स्टेट बैंक के रिटायर्ड अधिकारी हैं। नौकरी पेशा परिवार की तरह ही इनकी भी जिंदगी चल रही थी। रौनक का इंटरमीडिएट पूरा होने के बाद पिता ने इन्हें बीटेक कराया। रौनक ने गाजियाबाद से इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद पुणे से एमबीए किया। वर्ष 2011 में इन्हें चेन्नई में एक ऑटोमोबाइल कंपनी में नौकरी मिल गई। नौ लाख रुपये सालाना पैकेज से शुरू हुई नौकरी वर्ष 2016 में 20 लाख के पैकेज में बदल गई।
कई ऑटोमोबाइल कंपनियों में अनुभव लेने के बाद मार्च, 2016 में इन्होंने नौकरी छोड़ दी। रौनक के इस कदम से परिवार के सभी लोग हैरत में पड़ गए। इनके अगले कदम से पत्नी इशिता के अलावा कोई वाकिफ नहीं था। दो महीने के भीतर ही इन्होंने उधार, व्यवहार और खुद की बचत से 50 लाख रुपये की व्यवस्था की। फ्यूचर ट्रक ऑटो मोबाइल लिमिटेड नाम से खुद की कंपनी शुरू की। इस कंपनी ने सभी भारी वाहनों मसलन ट्रक, बस, डंपर, हाइवा आदि की डीलरशिप ली। शुरुआत पनकी और भौंती से की। हर बिजनेस की तरह इसमें भी तमाम उतार चढ़ाव और असफलताएं सामने आईं, लेकिन इन्होंने हार नहीं मानी। काम शुरू करने के बाद इसे बढ़ाने के लिए बैंक से लोन भी लिया। पत्नी इशिता (एलएलबी, सीएस, एमबीए) ने भी इनके काम में हाथ बंटाना शुरू किया। अनुभवी व्यक्तियों ने साथ काम करने से मना किया तो नए लोगों को तैयार किया।
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- फोटो : success
यूपी के सबसे बड़े डीलर बने
रौनक और इशिता ने महज ढाई साल के भीतर अपनी कंपनी को 100 करोड़ के टर्नओवर में तब्दील कर दिया। अब ये ऑटोमोबाइल क्षेत्र में यूपी के सबसे बड़े डीलर हैं। हिंदुजा बंधुओं ने बीते साल इन्हें देश के सबसे अच्छे सेवा प्रदाता के सम्मान से नवाजा। दो साल में इनकी कंपनी तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी है। अब इनकी फतेहपुर, फर्रुखाबाद और घाटमपुर में भी डीलरशिप है।
रौनक और इशिता ने महज ढाई साल के भीतर अपनी कंपनी को 100 करोड़ के टर्नओवर में तब्दील कर दिया। अब ये ऑटोमोबाइल क्षेत्र में यूपी के सबसे बड़े डीलर हैं। हिंदुजा बंधुओं ने बीते साल इन्हें देश के सबसे अच्छे सेवा प्रदाता के सम्मान से नवाजा। दो साल में इनकी कंपनी तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकी है। अब इनकी फतेहपुर, फर्रुखाबाद और घाटमपुर में भी डीलरशिप है।
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युवाओं को संदेश
रौनक कहते हैं, ‘चीन की एक कहावत है कि पेड़ लगाने का सबसे अच्छा समय 20 वर्ष पहले था। यदि तब नहीं लगा पाए तो आज लगा दें। इससे बेहतर वक्त कभी नहीं मिलेगा।’ मतलब किसी काम को करने का अच्छा समय कभी नहीं होता। जब शुरुआत कर दें तभी अच्छा समय होता है। युवा बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए जी जान से जुट जाएं। बिना सपना संजोये बड़ी सफलता नहीं मिलती।
रौनक कहते हैं, ‘चीन की एक कहावत है कि पेड़ लगाने का सबसे अच्छा समय 20 वर्ष पहले था। यदि तब नहीं लगा पाए तो आज लगा दें। इससे बेहतर वक्त कभी नहीं मिलेगा।’ मतलब किसी काम को करने का अच्छा समय कभी नहीं होता। जब शुरुआत कर दें तभी अच्छा समय होता है। युवा बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए जी जान से जुट जाएं। बिना सपना संजोये बड़ी सफलता नहीं मिलती।
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