आईएएस-आईपीएस बनने का सपना लेकर हर साल लाखो की संख्या में परीक्षार्थी यूपीएससी की परीक्षा में शामिल होते हैं। उनमें से कई अच्छे घराने से ताल्लुक रखते हैं, तो कोई आर्थिक तंगी का शिकार होता है। उन्हीं में से कई ऐसे भी होते हैं, जो दिव्यांग होने के बावजूद इस परीक्षा को पास करने का हौसला रखते हैं। ऐसे ही कुछ दिव्यांग परीक्षार्थियों के बारे में यहां जानेंगे जिन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर समाज में मिसाल कायम करने में कामयाब रहे हैं।
प्रांजल पाटिल
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आईएएस प्रांजल पाटिल
- फोटो : facebook/thebetterindia
प्रांजल पाटिल देश की पहली महिला दृष्टिबाधित आईएएस अधिकारी हैं। महाराष्ट्र की उल्लासनगर की रहने वाली प्रांजल पाटिल की आंखों की रोशनी बचपन में ही चली गई थी। दृष्टिबाधित होने के बादजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और यूपीएससी की तैयारी भी की। उन्होंने पीएचडी और एमफिल की डिग्री भी हासिल की है। उन्होंने बिना कोचिंग के ही यूपीएससी की तैयारी की। साल 2017 में उन्होंने 124वीं रैंक के साथ यूपीएससी पास कर आईएएस अफसर बनीं।
सम्यक जैन
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सम्यक जैन
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखने वाले सम्यक जैन ने अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी की परिक्षा पास की थी। सम्यक बचपन से दृष्टिबाधित नहीं थे, 20 की उम्र में उनकी आंखों की रोशनी कम होना शुरू हुई और फिर धीरे-धीरे उन्हें सबकुछ दिखना ही बंद हो गया। उन्होंने ऑडियो बुक की मदद से यूपीएससी की तैयारी की। अपने दूसरे प्रयास में सम्यक ने सातवीं रैंक के साथ यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनें।
आईएएस आयुषी डबास
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आयुषी डबास
- फोटो : अमर उजाला
दृष्टिबाधित होने के बावजूद आयुषी डबास ने यूपीएससी की परीक्षा पास की। हालांकि, उन्होंने यह उपलब्धि अपने पांचवें प्रयास में हासिल की थी। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षिका के तौर पर की थी। दृष्टिबाधित होने के कारण उन्हें बच्चों को पढ़ाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। आयुषी ने इसी के साथ यूपीएससी की तैयारी जारी रखी। साल 2021 में उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर 48वीं रैंक के साथ यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस अफसर बनीं।
आईएएस अखिला बीएस
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IAS Akhila BS
- फोटो : Social Media
आईएएस अखिला बीएस की सफलता भी समाज के लिए मिसाल बन चुकी है। साल 2000 में एक दुर्घटना में उन्होंने अपना दाहिना हाथ खो दिया था। इस दुर्घटना के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने दूसरे हाथों से लिखना शुरू किया और अपनी पढ़ाई पूरी की। यूपीएससी की परीक्षा के लगातार लिखना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने इस चुनौती का भी डटकर सामना किया और साल 2020 और 2021 में असफल होने के बाद तीसरे प्रयास में 760वीं रैंक के साथ आईएएस बनीं।
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