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इस महिला ने कम पैसे में खड़ा किया अपना खुद का बिजनेस अब दूसरों को दे रही हैं रोजगार

Thu, 10 Jan 2019 06:35 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Garima Garg Updated Thu, 10 Jan 2019 06:35 PM IST
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success stories of sudarshan kangra know about herself
चल रहे समय में सब पैसे को ज्यादा अहमियत देते हैं। सीखने से ज्यादा सब पैसे कमाने में लगे रहते हैं। यहां हम बात एक ऐसी महिला की कर रही हैं जिसने कम उम्र में अपना हाथ खो दिया।  आइये जानते हैं कैसे उन्होंने अपने जीवन में सफलता को प्राप्त किया।
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कांगड़ा के रैत की सुदर्शना, महिला सशक्तीकरण की मिसाल बनकर उभरी हैं। इनकी कहानी काफी दिलचस्प है। मात्र डेढ़ साल की उम्र में अपना हाथ खो देने के बावजूद न सिर्फ उन्होंने खुद को सशक्त बनाया बल्कि वह हजारों महिलाओं को हुनर सिखाकर उन्हें स्वरोजगार से भी जोड़ रही हैं। ऐसा करना हर किसी के बस में नहीं होता। 
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सबसे खास बात ये है कि वे बेकार चीड़ की पत्तियों से घरेलू और सजावटी उत्पाद बनाती हैं। शायद ही आपने ऐसे काम के बार में सुना होगा। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि 48 वर्षीय सुदर्शना कुमारी को नवाचार स्टार्टअप इंडिया की ओर से कुछ दिन पूर्व ही हीरो ऑफ द स्टेट अवार्ड से नवाजा गया। अब वह दिल्ली में देश भर के प्रतिभागियों के सामने हिमाचल का प्रतिनिधित्व करेंगी।
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sudhrashna kangra
चीड़ की पत्तियों से न केवल चपाती बॉक्स बनाती हैं बल्कि फूलदान, टेबल मैट, पेन बॉक्स, ट्रे आदि उत्पाद भी तैयार करती हैं। इसेक साथ ही वे पर्यटन विभाग के स्वरोजगार कार्यक्रम से भी जुड़कर प्रशिक्षण दे रही हैं। वे चाहती हैं इस काम के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोग जानें और उससे जुड़ें। कांगड़ा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की छात्रों को भी ट्रेनिंग देती हैं।
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आपको बता दें कि स्वास्थ्य विभाग ने सुदर्शना को 65 प्रतिशत हाथ जलने का दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया है। पर फिर भी उन्होंने नहीं मानी। सुदर्शना ने कभी भी नहीं कहा कि वह दिव्यांग है।इसे वे अपनी कमजोरी नहीं ताकत मानती हैं। शिविका स्वयं सहायता समूह का गठन कर महिलाओं को सशक्त बनाने का काम कर रही हैं। अपने घर के साथ  वे अनेकों धर के चूल्हें जला रही हैं। 
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