महाराष्ट्र के सोलापुर के सरकारी स्कूल के शिक्षक रणजीत सिंह डिसले को ग्लोबल टीचर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। लंदन में एक ऑनलाइन समारोह में उनके चुने जाने की घोषणा अभिनेता स्टीफन फ्राई ने की थी। पहली बार भारत के किसी शिक्षक को यह अवार्ड मिला है। यूनेस्को और लंदन के वार्की फाउंडेशन द्वारा दिए जाने वाले इस पुरस्कार में उन्हें 7 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। विश्व के 140 देशों से 12 हजार से अधिक शिक्षकों में से डिसले को चुना गया है।
डिसले ने अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर पहली बार किताबों में क्यूआर कोड शुरू करने की पहल की। उन्होंने हर पाठ और कविताओं का क्यूआर कोड बनाया है। इतना ही नहीं साल 2017 में महाराष्ट्र सरकार को ये प्रस्ताव दिया कि सारा सिलेबस इससे जोड़ दिया जाए। इसके बाद डिसले की ये बात पहले प्रायोगिक स्तर पर चली और तब जाकर राज्य सरकार ने घोषणा की कि वह सभी श्रेणियों के लिए राज्य में क्यूआर कोड पाठ्यपुस्तकें शुरू करेगी। अब तो एनसीईआरटी ने भी ये घोषणा कर दी है।
क्या होता है क्यूआर कोड?
क्यूआर कोड का फुल फॉर्म है क्विक रिस्पॉन्स कोड। इसे बारकोड की अगली जेनरेशन कहा जाता है जिसमें हजारों जानकारियां सुरक्षित रहती हैं। अपने नाम के ही मुताबिक ये तेजी से स्कैन करने का काम करता है। ये स्क्वायर आकार के कोड होते हैं, जिसमें सारी जानकारी होती है। किसी उत्पाद, फिर चाहे वो किताबें हों या अखबार या फिर वेबसाइट सबका एक क्यूआर कोड होता है।
सोलापुर के बुरी तरह से सूखाग्रस्त गांव में जिला परिषद प्राइमरी स्कूल के टीचर डिसले को उनकी कोशिशों के कारण दुनिया के सबसे अद्भुत टीचर का अवॉर्ड मिला है। वार्की फाउंडेशन ने असाधारण शिक्षक को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कृत करने उद्देश्य से 2014 में यह पुरस्कार शुरू किया था, जिसके लिए इस साल दुनियाभर से 12000 हजार शिक्षकों की एंट्री आई थी। इनाम की राशि का एलान होते ही डिसले ने आधी राशि बाकी प्रतिभागी शिक्षकों में बांटने की घोषणा की है। वे कहते हैं कि शिक्षक हमेशा देने और बांटने में यकीन करते हैं, इनाम की आधी राशि बांटने पर हर एक रनर-अप के हिस्से 40 हजार पाउंड आएंगे।
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