साल 2019 के लिए नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नाम की घोषणा जारी है। फीजिक्स और केमिस्ट्री के लिए नोबेल विजेताओं के नाम की घोषणा की जा चुकी है। आज साहित्य के नोबेल की घोषणा होने वाली है। इस बीच हम आपको नोबेल पुरस्कार से जुड़ी कुछ रोचक बातें बता रहे हैं।
जब नीलाम करना पड़ा था नोबेल पुरस्कार, जानें क्या थे कारण
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11 अप्रैल 2013... जब नोबेल पुरस्कार नीलाम हुआ। तब सुर्खियां बनीं कि 111 साल के इतिहास में पहली बार कोई नोबेल पुरस्कार नीलाम होने जा रहा है। लेकिन नोबेल पदक नीलाम करने वाली अधिकृत कंपनी 'हेरिटेज ऑक्शंस' के अनुसार यह दूसरी बार था।
आगे पढ़ें.. किसने नीलाम किया था नोबेल पदक
- 1962 में जीवों के गुणसूत्रों की संरचना (DNA) की खोज करने वाले वैज्ञानिक डॉ. फ्रांसिस क्रिक के परिवार ने उनके नोबेल पदक की नीलामी की थी।
- हेरिटेज ऑक्शंस के अनुसार, 2013 में यह नीलामी 1.3 मिलियन पौंड (करीब 11.28 करोड़ रुपये) में हुई थी। यह रकम नीलामी के लिए लगाए गए अनुमान, 3.55 करोड़ से कहीं ज्यादा थी।
- कंपनी ने बताया था कि इसे खरीदने वाले शख्स का नाम जैक वैग है, जो सिलिकॉन वैली और शंघाई में स्थित एक पुनरुत्पादक चिकित्सा प्रौद्यिगिकी कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।
- डॉ. फ्रांसिस क्रिक के सोने के पदक की खास बात ये थी कि उसपर उनका नाम अंकित था।
आगे पढ़ें.. क्यों नीलाम किया गया नोबेल
- डॉ. क्रिक के परिवार का कहना था कि वे इस पदक को किसी संग्रहालय या संस्थान को सौंपना चाहते हैं, ताकि इसे सामान्य लोगों के लिए रखा जा सके।
- क्रिक परिवार का मानना था कि इससे नई पीढ़ी के लोगों व वैज्ञानिकों को प्रेरणा मिलेगी।
- उनका कहना था कि इस नीलामी से मिलने वाली राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा लंदन स्थित फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट में अनुसंधान के कार्यों में लगाया जाएगा। दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों के उपचारों की खोज की जाएगी।
पहली बार कब नीलाम हुआ था नोबेल
2013 से पहले नोबेल पुरस्कार की सार्वजनिक नीलामी नवंबर 2012 में की गई थी। 1975 में भौतिक विज्ञान (Physics) में नोबेल पाने वाले ऐगे नील्स बोहर के पदक की नीलामी हुई थी। इससे करीब 35.53 लाख रुपये की प्राप्ति हुई थी।
तब कहा भी गया था कि एक ओर नोबेल पुरस्कार के नीलाम होने से लोगों में निराशा उत्पन्न हो सकती है। लेकिन दूसरी ओर इसके सकारात्कम पहलू भी हैं। इससे मिलने वाली धनराशि को अनुसंधान के कार्यों में लगाया जाएगा।
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