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वो लोग जिन्होंने ठुकरा दिया नोबेल पुरस्कार, जानें क्यों

Thu, 10 Oct 2019 04:15 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Thu, 10 Oct 2019 04:15 PM IST
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Nobel winners who did not accept nobel prize awarded to them, Know reasons
- फोटो : अमर उजाला

नोबेल पुरस्कारों का इतिहास काफी रोचक रहा है। साथ ही विवादास्पद भी। ऐसा भी हुआ है जब शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विश्व का यह सर्वोच्च सम्मान लेने से लोगों ने मना कर दिया। 



कौन थे वो विजेता जिन्होंने नोबेल लेने से इनकार कर दिया था? विजेताओं ने क्यों नहीं लिया था नोबेल पुरस्कार? इन सवालों के जवाब आगे की स्लाइड्स में पढ़ें।

Nobel winners who did not accept nobel prize awarded to them, Know reasons
ज्यां पॉल सार्त्र - फोटो : wiki

नोबेल पुरस्कारों के इतिहास में दो ऐसे व्यक्ति रहे हैं, जिन्होंने यह पुरस्कार लेने से मना कर दिया था। उनमें से पहले हैं ज्यां पॉल सार्त्र।

फ्रांस के ज्यां पॉल सार्त्र को 1964 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। लेकिन उन्होंने इसे लेने से मना कर दिया। क्योंकि सार्त्र ने फैसला किया था कि वो कोई भी सरकारी सम्मान स्वीकार नहीं करेंगे।

दूसरे व्यक्ति के बारे में आगे पढ़ें

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ले डक थो - फोटो : nobelpeacesummit.com

नोबेल को मना करने वाले दूसरे व्यक्ति थे ले डक थो। वियतनाम के ले डक थो को 1973 में अमेरिकी राज्य सचिव हेनरी किसिंजर के साथ नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें वियतनाम शांति समझौते के लिए यह सम्मान दिया गया था। लेकिन ले डक थो ने यह कहते हुए नोबेल स्वीकार नहीं किया कि 'वियतनाम में युद्ध विराम के बावजूद शांति की स्थापना नहीं हो पाई।'

आगे पढ़ें उन लोगों के बारे में जिन्हें उनके देश ने नोबेल नहीं लेने दिया

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रिचर्ड कुह्न, एडोल्फ फ्रेड्रिक बटनांट और गेरहार्ड डोमाक - फोटो : nobelprize.org

ऐसे चार लोग रहे हैं। तीन तो जर्मनी के हैं - रिचर्ड कुह्न (केमिस्ट्री के लिए 1938 में नोबेल), एडोल्फ फ्रेड्रिक बटनांट (केमिस्ट्री के लिए 1939 में नोबेल), गेरहार्ड डोमाक (चिकित्सा के लिए 1939 में नोबेल)। इन तीनों को एलोल्फ हिटलर ने नोबेल लेने से मना कर दिया था।

हालांकि जर्मनी के इन तीनों विद्वानों को बाद में नोबेल पुरस्कार प्रशस्ति पत्र और पदक स्वीकार करने की अनुमति मिली। लेकिन उन्हें पुरस्कार राशि से वंचित रहना पड़ा।

ये भी पढ़ें : जब नीलाम करना पड़ा था नोबेल पुरस्कार, जानें क्या थे कारण

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बोरिस पास्तरनेक - फोटो : Twitter

इनके अलावा बोरिस पास्तरनेक वो चौथे व्यक्ति रहे जिन्हें उनके देश ने नोबेल नहीं लेने दिया। बोरिस को 1958 में साहित्य के लिए नोबेल दिया गया था। लेकिन सोवियत संघ के अधिकारियों द्वारा दबाव डालने के कारण बोरिस ने नोबेल स्वीकार करने से मना कर दिया।

ये भी पढ़ें : इस परिवार के नाम है नोबेल जीतने का रिकॉर्ड, जानें पति-पत्नी ने मिलकर जीते कितने पुरस्कार

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