जनवरी माह की 12 तारीख का दिन पूरे देश के लिए बेहद खास है। यह सिर्फ एक सामान्य तारीख नहीं है। 12 जनवरी को भारत के महान दार्शनिक, आध्यात्मिक और सामाजिक नेताओं में से एक स्वामी विवेकानंद की जयंती हैं। हमारा देश युवाओं का देश है और युवाओं के लिए यह एक अवसर है उस महान आत्मा को याद करने का जिसने 128 साल पहले समूचे विश्व में भारत का नाम रोशन किया। दुनिया का परिचय भारतीय संस्कृति और सनातन जीवन पद्धति से कराया। उनके सम्मान में 12 जनवरी को पूरे देश में राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है। आइए जानते हैं कब और कैसे हुई इस परंपरा की शुरुआत और क्या है राष्ट्रीय युवा दिवस का महत्व और इतिहास...
National Youth Day 2021 : आज पूरा देश मना रहा राष्ट्रीय युवा दिवस, जानें क्या है इसका इतिहास
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स्वामी विवेकानंद का जीवन एक नजर में :
योग वेदांत संस्कृति को पुनर्जीवित किया : देश में स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और विचारों को सम्मान देने के लिए हर साल राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में युवाओं के महत्व के बारे में बहुत मुखर थे। विवेकानंद ने विदेशों में जो हासिल किया उसने भारत की आध्यात्मिकता छवि और योग वेदांत संस्कृति को पुनर्जीवित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई है।
शिकागो में विश्व धर्म संसद से मिली ख्याति :
1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में उन्होंने जो भाषण दिया, वह "अमेरिका की बहनों और भाइयों" के साथ शुरू हुआ, जिसने उन्हें विश्व स्तर पर अलौकिक और तेजस्वी वक्ता एवं दार्शनिक के तौर पर पहचान दिलाई। उनके दिए गए उपदेश और बताए गए आदर्शों आज भी अमर हैं। स्वामी विवेकानंद ने हमेशा युवाओं की क्षमता का दोहन करने पर ध्यान केंद्रित किया। वह युवा पीढ़ी को प्रेरित करना चाहते थे ताकि वे अंग्रेजों का मुकाबला कर सकें और स्वतंत्रता प्राप्त कर सकें।
शिक्षा और शांति ही हथियार :
स्वामी विवेकानंद के विचारों में ऐसी क्षमता है कि वो हर किसी व्यक्ति के जीवन को बदल सकते हैं। विवेकानंद के दुनिया को जीतने के हथियार शिक्षा और शांति थे। वे चाहते थे कि युवा अपने आरामदायक जीवनचर्या से बाहर निकलें और वे अपनी इच्छा के अनुसार कुछ हासिल करें। विवेकानंद ने अपने हर विचार को बुद्धि और तर्क के जरिए स्थापित किया। विवेकानंद को दर्शन, धर्म, साहित्य, वेद, पुराण, उपनिषद विलक्षण समझ थी। विवेकानंद का कहना था कि पढ़ने के लिए एकाग्रता जरूरी है और एकाग्र होने के लिए ध्यान जरूरी है। ध्यान से ही हम अपनी इंद्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते हैं।
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