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आंदोलन: कहीं दीक्षांत समारोह का विरोध, कहीं मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा...अगस्त में क्यों भड़के छात्र?

Mon, 31 Aug 2026 04:38 PM IST
Akash Kumar पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Akash Kumar Updated Mon, 31 Aug 2026 04:38 PM IST
सार

अगस्त 2026 में देश के कई बड़े उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। नालसर, एनएलएसआईयू, आईआईटी दिल्ली, जामिया और आईआईएसईआर पुणे में छात्र आंदोलन चर्चा में रहे। आइए जानते हैं कि इन आंदोलनों के मुद्दे क्या थे और किन मांगों को लेकर छात्रों ने प्रशासन के सामने आवाज उठाई।
 

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August Campus Protests: NALSAR to IIT Delhi, Why Students Protested Across Top Institutes
August Campus Protests - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

जुलाई में नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक के विरोध में देशभर में प्रदर्शन हुए थे। इस विवाद के बीच तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद अगस्त की शुरुआत भी शांत नहीं रही। देश के कई प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए। इनमें दीक्षांत समारोह में कुछ प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी, प्रवेश प्रक्रिया और परीक्षा परिणाम में पारदर्शिता, छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य, छात्रावास के नियम और अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल रहे।

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नालसार विवाद - फोटो : Amar Ujala Graphics

नालसार में मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी का क्यों हुआ विरोध?

हैदराबाद स्थित नालसार विधि विश्वविद्यालय में 400 से अधिक छात्रों ने दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की प्रस्तावित मौजूदगी का विरोध किया। छात्रों ने यह आपत्ति उस मामले को लेकर जताई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ ने दिल्ली के जंतर-मंतर से 20 जुलाई को निकाले गए ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान छात्रों के साथ कथित पुलिस ज्यादती से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।

इसके बावजूद नालसार ने मुख्य न्यायाधीश को आमंत्रण दिया। इसके बाद विवाद और बढ़ गया। इसी बीच भारतीय विधिज्ञ परिषद ने राज्य विधिज्ञ परिषदों को नालसार के 2026 बैच के स्नातकों का अधिवक्ता के रूप में नामांकन अगली सूचना तक नहीं करने का निर्देश दिया। हालांकि, परिषद ने कुछ ही घंटों में यह आदेश वापस ले लिया। बाद में उसने बताया कि इस बैच के खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई है।

इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने नालसार का निमंत्रण स्वीकार ही नहीं किया था। इसलिए उनके दीक्षांत समारोह में शामिल होने की कोई योजना नहीं थी।

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एनएलएसआईयू के छात्रों का सीजेआई के प्रति विरोध - फोटो : अमर उजाला

बंगलूरू के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में क्या हुआ?

बंगलूरू स्थित राष्ट्रीय विधि विद्यालय के 700 से अधिक विद्यार्थियों, वर्तमान छात्रों और पूर्व छात्रों ने एक बयान पर हस्ताक्षर किए। इसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और भारतीय विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की प्रस्तावित मौजूदगी का विरोध किया गया।

छात्रों और पूर्व छात्रों ने नालसार के 2026 बैच के स्नातकों के नामांकन पर जारी किए गए और बाद में वापस लिए गए निर्देश को लेकर भी भारतीय विधिज्ञ परिषद से माफी की मांग की।

इस विवाद के बाद विश्वविद्यालय ने 2026 के स्नातक बैच का 34वां वार्षिक दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया। विश्वविद्यालय ने इसके लिए “अपरिहार्य परिस्थितियों” का हवाला दिया।

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आईआईटी दिल्ली - फोटो : अमर उजाला

आईआईटी दिल्ली में छात्र किस मांग को लेकर प्रदर्शन पर उतरे?

दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में 31 वर्षीय एमएससी छात्र की मौत के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने मामले की स्वतंत्र जांच, संस्थान के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और परिवार के लिए मुआवजे की मांग की।

संस्थान के निदेशक रंगन बनर्जी ने प्रदर्शन के दौरान परिसर के शांतिपूर्ण संचालन में बाधा डालने और “धमकी भरे नारे” लगाने वाले छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी।

मामले की जांच के लिए गठित बाहरी समिति में बाद में बदलाव किया गया। पहले उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार को समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए खुद को समिति से अलग कर लिया। इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता को नई समिति का अध्यक्ष बनाया गया।

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जामिया मिलिया इस्लामिया - फोटो : JMI

जामिया में छात्रों ने किन मुद्दों पर प्रदर्शन किया?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन की जामिया इकाई से जुड़े छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना दिया।

छात्रों की प्रमुख मांगें थीं:

  • परीक्षा परिणाम में पारदर्शिता
  • प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा
  • प्रवेश प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और जवाबदेही
  • इन मामलों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की स्पष्टता


विश्वविद्यालय ने प्रदर्शन में शामिल चार छात्रों को निलंबित कर दिया और उन्हें परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया। विश्वविद्यालय का कहना था कि छात्रों ने केंद्रीय कैंटीन में ऐसे स्थान पर धरना दिया, जो प्रदर्शन के लिए निर्धारित नहीं था। प्रशासन के अनुसार, छात्रों को पहले ही बताया गया था कि विरोध प्रदर्शन केवल निर्धारित स्थान पर किया जा सकता है।

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