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National Education Day: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर क्या है इस बार थीम, यहां पढ़िए सबकुछ

Fri, 11 Nov 2022 03:30 PM IST
सौरभ पांडेय एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली Published by: सौरभ पांडेय Updated Fri, 11 Nov 2022 03:30 PM IST
सार

National Education Day: राष्ट्रीय शिक्षा दिवस हर साल 11 नवंबर को मनाया जाता है। क्योंकि इस दिन को भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के रूप में मनाते हैं। 

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national Education Day is celebrated to commemorate the birth anniversary of Maulana Abul Kalam Azad
national education day 2022 - फोटो : national education day 2022

विस्तार

National Education Day: जीवन में शिक्षा का सबसे अहम स्थान होता है। हर व्यक्ति का जीवन उसकी शिक्षा पर निर्भर होता है। जैसी शिक्षा व्यक्ति को दी जाएगी, उसका जीवन उसी अनुसार चलेगा। आज हम पूरे देश में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मना रहे हैं।  हर साल 11 नवंबर को भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती के उपलक्ष्य में इस दिन को मनाया जाता है। इस दिन शिक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने और प्रत्येक व्यक्ति को साक्षर बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम और अभियान आयोजित किए जाते हैं। 11 सितंबर, 2008 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने हर साल 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। मौलाना आजाद को मरणोपरांत 1992 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। 
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आजाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री
मौलाना अबुल कलाम आजाद या मौलाना सैय्यद अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन अहमद बिन खैरुद्दीन अल-हुसैनी आजाद का जन्म 11 नवंबर, 1888 को हुआ था। मौलाना अबुल कलाम आजाद 1947 से 1958 तक पंडित जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में पहले शिक्षा मंत्री थे। मौलाना अबुल कलाम आजाद न केवल एक विद्वान थे बल्कि शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए प्रतिबद्ध थे। वह एक सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाने जाते थे। मौलाना अबुल कलाम आजाद देश के आईआईटी और कई प्रमुख संस्थानों की बेहतरी के लिए काम किया।  एक कवि, विद्वान, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी, उन्होंने कई नेताओं के साथ भारत के निर्माण में योगदान दिया। लेकिन भारत के लिए उनका सबसे बड़ा योगदान शिक्षा का उपहार रहा है।
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2022 की थीम
मौलाना आजाद के अनुसार स्कूल प्रयोगशालाएं हैं जो देश के भावी नागरिक तैयार करती हैं। "किसी भी प्रणाली का प्राथमिक उद्देश्य संतुलित दिमाग बनाना है जिसे गुमराह नहीं किया जा सकता है।  मौलाना आजाद ने कई संस्थानों की स्थापना की जिनमें ललित कला अकादमी, संगीत नाटक अकादमी और साहित्य अकादमी शामिल हैं।   इस बार राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2022 की थीम  विषय "पाठ्यक्रम बदलना और शिक्षा को बदलना" है। शिक्षा मंत्रालय हर साल एक अलग फोकस क्षेत्र निर्धारित करता है। 
 
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना

1920 में उन्हें यूपी के अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना के लिए फाउंडेशन कमेटी के सदस्य के रूप में चुना गया था। उन्होंने 1934 में विश्वविद्यालय परिसर को अलीगढ़ से नई दिल्ली स्थानांतरित करने में भी सहायता की। अब परिसर के मुख्य द्वार का नाम उनके नाम पर रखा गया है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग की स्थापना, 1951 में प्रथम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और 1953 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना की।
उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान या आईआईएससी बैंगलोर की स्थापना पर जोर दिया। पहले भारतीय शिक्षा मंत्री के रूप में आजाद का मुख्य ध्यान स्वतंत्रता के बाद के भारत में ग्रामीण गरीबों और लड़कियों को शिक्षित करना था। शिक्षा सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने वयस्क साक्षरता, 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य, सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा, और माध्यमिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर जोर दिया। 





 
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इन शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना

आजाद ने कई शैक्षणिक संस्थानों- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), माध्यमिक शिक्षा आयोग, अन्य निकायों की स्थापना में योगदान दिया है। उनके कार्यकाल में जामिया मिलिया इस्लामिया और 1951 में पहला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी खड़गपुर खड़गपुर जैसे संस्थानों की स्थापना की गई। वह भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), साहित्य अकादमी, ललित कला अकादमी, संगीत नाटक अकादमी और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद की स्थापना में शामिल थे।
16 जनवरी 1948 को अखिल भारतीय शिक्षा पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हमें एक पल के लिए भी नहीं भूलना चाहिए, कम से कम बुनियादी शिक्षा प्राप्त करना प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है, जिसके बिना वह एक नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी तरह से निर्वहन नहीं कर सकता है।  उन्होंने IIT की क्षमता में विश्वास किया और कहा, 'मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस संस्थान की स्थापना देश में उच्च तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान की प्रगति में एक मील का पत्थर बनेगी। 

यहां पर कुछ कोट्स लिखे जा रहे हैं , जिन्हें आपको जरूर पढ़ना चाहिए-
  • शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसे आप दुनिया बदलने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। - नेल्सन मंडेला
  • अच्छे शिक्षक वे होते हैं जो हमें खुद के बारे में सोचना सिखाते हैं। - एस.राधाकृष्णन
  • सफलता कभी अंतिम नहीं होती और न ही विफलता घातक होती है। जो मायने रखता है वह है आपका साहस। - विंस्टन चर्चिल
  • जो कुछ भी हमने स्कूल में सीखा है, वो सब भूल जाने के बाद भी जो हमें याद रहता है, वो ही हमारी शिक्षा है।"  - अल्बर्ट आइंस्टीन
  • अगर लोग मुझे एक अच्छे शिक्षक के रूप में याद करते हैं तो मेरे लिए यह सबसे बड़ा सम्मान होगा।  - डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम
  • शिक्षा का उद्देश्य है युवाओं को खुद को जीवन भर शिक्षित करने के लिए तैयार करना।  -राबर्ट एम हचिंस
  • जो आपने सीखा है उसे भूल जाने के बाद जो रह जाता है वो शिक्षा है। - बी. ऍफ़. स्किन्नर
  • भविष्य में वो अनपढ़ नहीं होगा जो पढ़ ना पाए। अनपढ़ वो होगा जो ये नहीं जानेगा की सीखा कैसे जाता है।  -अल्विन टोफ्फ्लर
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