पिछले कई दिनों से दिल्ली स्थित जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध है हॉस्टल की बढ़ी फीस का।
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JNU मामला: कितना सही है छात्रों का विरोध प्रदर्शन, कैसे कम हो सकती है फीस
Thu, 21 Nov 2019 07:43 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया
बीबीसी
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Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया
Updated Thu, 21 Nov 2019 07:43 AM IST
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- फोटो : विवेक निगम
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जेएनयू के नए नियमों के मुताबिक कम से कम 3,350 रुपये हर महीने एक ईडब्लूएस वर्ग के छात्र को देना है। इसके अलावा मेस फीस अलग और बिजली, पानी और रख-रखाव का चार्ज अलग।
एक छात्र का खर्च कितना बढ़ा?
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- बीबीसी ने जेएनयू में एमफिल कर रहे एक छात्र से बात की, जिनके परिवार की कमाई 12 हजार से कम होने की वजह से उन्हें 5 हजार रुपये स्कॉलरशिप मिलती है।
- उनकी ऐवरेज मेस फीस है तकरीबन 3 हजार रुपये महीना है। अब इसमें 3350 और जोड़ दीजिए और साथ में बिजली-पानी और रख-रखाव का खर्च।
- तो ये कुल खर्च उनकी स्कॉलरशिप से ज्यादा हो जाता है। एक छात्र के खर्च में इन सबके अलावा किताबें और दूसरी जरूरी चीजें भी होंगी। हर सेमेस्टर में इस्टेबलिशमेंट चार्ज भी है और कुछ सालाना फीस अलग।
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छात्रों के प्रदर्शन के बाद इसमें बदलाव ये हुआ कि 12,000 से कम पारिवारिक कमाई वाले छात्रों के हॉस्टल रूम का खर्च आधा यानी 300 और 150 रुपये कर दिया गया। सरकार ने इसे 'मेजर रोलबैक' यानी 'भारी कटौती' के तौर पर पेश किया।
कितने छात्र होंगे प्रभावित?
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- अगर जेएनयू की वेबसाइट पर 2017-18 की आधिकारिक सालाना रिपोर्ट देखें, तो उस सत्र में 1,556 छात्रों को एडमिशन दिया गया था। जिनमें से 623 ऐसे छात्र थे जिनके परिवार की मासिक आय 12,000 रुपये से कम है। यानी 40 फीसदी ऐसे छात्र आए।
- 12,0001 रुपये से ज्यादा कमाई वाले परिवारों से 904 छात्र आए। मतलब ये आय 20 हजार रुपये महीना भी हो सकती है और 2 लाख महीना भी। इनमें से 570 बच्चे सरकारी स्कूलों से पढ़ कर आए थे। यानी 36 फीसदी।
- फीस बढ़ोतरी के विरोध में जेएनयू का एबीवीपी छात्र संगठन भी शामिल है। हालांकि वे बाकी छात्रों के प्रदर्शन से सहमत नहीं हैं।
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