Forest Reserves in India: हैदराबाद (Hyderabad) के गाछीबाउली इलाके में जंगल की अंधाधुंध कटाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें भारी-भरकम बुलडोजर (bulldozers) रात के अंधेरे में घने पेड़ों को गिराते दिख रहे हैं। इस मार्मिक दृश्य में पास खड़े मोर और अन्य जंगली जीव डर से भागते नजर आ रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रेमियों और आम नागरिकों में गुस्सा और चिंता बढ़ गई है।
सरकार इस जंगल की जगह इमारतें (Building construction) बनाना चाहती है, लेकिन स्थानीय लोग, पर्यावरणविद् और छात्र इस कदम का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि किसी देश या इलाके में वन क्षेत्र कितना होना चाहिए? क्या कोई ऐसा नियम है जो यह तय करता हो? आइए, जानते हैं भारत के वन संरक्षण से जुड़े नियम और फॉरेस्ट रिजर्व (Forest Area) की स्थिति।
वनों का संरक्षण पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है, इसलिए कई देशों ने अपने भू-भाग के एक निश्चित हिस्से को वन क्षेत्र के रूप में सुरक्षित रखने के नियम बनाए हैं। भारतीय वन नीति 1988 के अनुसार, देश के कम से कम 33% क्षेत्र पर वन और वृक्षों का आवरण होना चाहिए।
हालांकि, मौजूदा स्थिति इस लक्ष्य से पीछे है, जिसे पूरा करने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं और कानूनों के माध्यम से प्रयास कर रही है।
2 of 5
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : freepik
पर्यावरण संतुलन के लिए वनों का महत्व
वनों का संरक्षण किसी भी देश के पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। भारत में वन क्षेत्र को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए सरकार ने कई नीतियां और कानून बनाए हैं। भारतीय वन नीति 1988 के अनुसार, देश के कम से कम 33% भू-भाग पर वन और वृक्षों का आवरण होना चाहिए। यह लक्ष्य न केवल जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में मदद करता है बल्कि मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा और वर्षा चक्र को संतुलित बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3 of 5
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : freepik
भारत का वर्तमान वन क्षेत्र
भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) की 2021 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल वन और वृक्ष आवरण 24.62% है। इसमें से 21.71% क्षेत्र वन भूमि के अंतर्गत आता है, जबकि 2.91% क्षेत्र में पेड़ों का विस्तार है। सबसे अधिक वन क्षेत्र मध्य प्रदेश में पाया जाता है, जबकि अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र भी वन संपदा के मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल हैं। भारत में घने जंगलों का कुल क्षेत्रफल लगभग 9.59% है, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
4 of 5
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : freepik
वन संरक्षण के लिए कानून और सरकारी प्रयास
वनों की सुरक्षा और विस्तार के लिए भारत में कई कानून लागू किए गए हैं, जिनमें भारतीय वन अधिनियम, 1927, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, वन संरक्षण अधिनियम, 1980 और कंपेनसेटरी अफॉरेस्टेशन फंड एक्ट, 2016 (CAMPA Act) शामिल हैं।
इन कानूनों का उद्देश्य अवैध कटाई को रोकना, वृक्षारोपण को बढ़ावा देना और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना है। इसके अलावा, सरकार द्वारा "हरित भारत मिशन", "वन महोत्सव" और अन्य वृक्षारोपण अभियानों के माध्यम से वन आवरण को बढ़ाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
5 of 5
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : freepik
वन संरक्षण की आवश्यकता और भविष्य की दिशा
हालांकि, शहरीकरण, औद्योगीकरण और कृषि भूमि के विस्तार के कारण भारत में वनक्षेत्र लगातार प्रभावित हो रहा है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण और बंजर भूमि की समस्या को देखते हुए वन क्षेत्र को बढ़ाने की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। सरकार और नागरिकों को मिलकर वृक्षारोपण अभियानों में भाग लेना चाहिए और वन संरक्षण नीतियों का पालन करना चाहिए ताकि 33% वन आवरण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके और पर्यावरण संतुलन बना रहे।
कमेंट
कमेंट X