Hyderabad IIT: आईआईटी हैदराबाद की टीम ने भारत के लिए स्मार्ट मोबिलिटी सॉल्यूशन बनाने के लिए अपने कैंपस में ड्राइवर रहित यानी सेल्फ-ड्राइविंग वाहनों के लिए एक तकनीक बनाई है।
Hyderabad: IIT हैदराबाद ने बनाई सेल्फ-ड्राइविंग वाहनों की एआई तकनीक, सुरक्षा और सुविधा सुधार पर काम जारी
Hyderabad: IIT हैदराबाद की टीम ने अपने कैंपस में सेल्फ-ड्राइविंग वाहनों के लिए एआई तकनीक विकसित की है। टीम अभी भी इसकी सुरक्षा और सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रही है।
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आईआईटी हैदराबाद में ड्राइवर रहित वाहन परीक्षण
हब के कार्यकारी अधिकारी संतोष रेड्डी ने रविवार को पीटीआई-भाषा को बताया, "हम हवाई और जमीनी, दोनों तरह के वाहनों में भारतीय परिदृश्य के लिए विशिष्ट स्वायत्त नेविगेशन तकनीक की खोज कर रहे हैं। जमीनी वाहनों में, हम यह देख रहे हैं कि भारतीय परिदृश्य में वाहन को कैसे चलाया जा सकता है और बुनियादी ढांचे से जुड़ी सीमाओं और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इसे कैसे चलाया जाए।"
उन्होंने बताया कि टीम द्वारा विकसित एक स्वचालित (चालक रहित) वाहन पिछले डेढ़ साल से संस्थान परिसर में एक सामान्य सड़क पर चल रहा है जहां छात्र और अन्य लोग यात्रा करते हैं और आज तक कोई दुर्घटना नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि इस वाहन में 10,000 से ज्यादा यात्री पहले ही यात्रा कर चुके हैं और उनसे मिली प्रतिक्रिया अच्छी रही है।
वर्तमान में इस वाहन का उपयोग सार्वजनिक सड़कों पर नहीं किया जाता है।
स्वायत्त नेविगेशन तकनीक: सभी वाहनों और परिस्थितियों में सक्षम
इस तकनीक को हवाई अड्डों, गोदामों और बड़े शैक्षणिक या औद्योगिक परिसरों जैसे स्थानों में उपयोग के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
रेड्डी ने पीटीआई वीडियोज को बताया कि 'ऑटोनोमस नेविगेशन स्टैक' किसी भी जलवायु परिस्थितियों और किसी भी वाहन, चाहे वह इलेक्ट्रिक हो या आईसी (आंतरिक दहन) इंजन वाला वाहन, में काम कर सकता है। इसे ऑटोनोमस वाहन में बदला जा सकता है।
फिलहाल, एहतियात के तौर पर एक ड्राइवर ही इस वाहन में यात्रा करता है, लेकिन वह वाहन की गति में कोई बाधा नहीं डालता।
रेड्डी ने बताया कि वह वाहन की निगरानी करता है और उसके संचालन में किसी भी समस्या की सूचना टीम को देता है।
वाहन को स्वायत्त और भरोसेमंद बनाने की दिशा में कदम
जब टीम ने इस परियोजना पर काम शुरू किया, तो वह बस चरण-दर-चरण आगे बढ़ना चाहती थी, न कि वाहन को किसी नियंत्रित वातावरण (जैसे किसी शैक्षणिक संस्थान के परिसर में) या व्यावसायिक उपयोग के लिए संचालित करने का लक्ष्य।
उन्होंने बताया कि पहली चुनौती एक ऐसे वाहन को तैयार करना था जो खुद चल सके। बाद में, टीम ने वाहन की दक्षता में सुधार लाने के उद्देश्य से इसमें सुविधाएँ और सुरक्षा सुधार जोड़े।
तकनीक या 'स्टैक' की वर्तमान स्थिति के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि सुरक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने और चालक की एहतियाती तैनाती को खत्म करने के प्रयास जारी हैं।
स्वायत्त वाहनों के लिए नई तकनीक तैयार
उन्होंने कहा कि उनके द्वारा विकसित तकनीक को वाहन के आकार और अन्य मापदंडों के अनुसार परिष्कृत किया जा सकता है।
रेड्डी ने बताया कि इस स्वचालित वाहन का प्रदर्शन कुछ अन्य स्थानों पर भी किया गया।
परियोजना के विस्तार की योजना के बारे में, उन्होंने कहा कि योजना सुविधाओं को बेहतर बनाने और उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने की है।
यह पूछे जाने पर कि क्या भविष्य में स्वचालित वाहनों के व्यावसायिक लॉन्च के लिए इस तकनीक को पेश करने की योजना है, उन्होंने कहा कि टीम किसी भी उद्योग भागीदार के सहयोग से इस पर काम करना चाहेगी।
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