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पिता थे कोर्ट में चपरासी, अब बेटी बनी जज, जानें किस रणनीति से पाया ये मुकाम
Tue, 03 Dec 2019 08:43 PM IST
Garima Garg
बीबीसी
बीबीसी
Published by: Garima Garg
Updated Tue, 03 Dec 2019 08:43 PM IST
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अर्चना कुमारी
- फोटो : social media
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हम लोगों का परिवार एक कमरे के सर्वेंट क्वॉर्टर में रहता था और हमारे क्वॉर्टर के आगे जज साहब की कोठी थी। पापा दिन भर जज साहब के पास खड़े रहते थे। बस वही कोठी, जज को मिलने वाला सम्मान और मेरे सर्वेंट क्वॉर्टर की छोटी सी जगह मेरी प्रेरणा बनी।" 34 साल की अर्चना के पिता सोनपुर रेलवे कोर्ट में चपरासी के पद पर थे। अब उनकी बिटिया अर्चना कुमारी ने 2018 में हुई 30वीं बिहार न्यायिक सेवक परीक्षा में सफलता हासिल की है।
अर्चना कुमारी
- फोटो : social media
घर में गरीबी का डेरा
मूल रूप से पटना के धनरूआ थाना अंतर्गत मानिक बिगहा गांव की अर्चना अपने गांव में 'जज बिटिया' के नाम से मशहूर हो रही हैं। चार भाई-बहन में सबसे बड़ी अर्चना के लिए ये सफर जिंदगी के बहुत घुमावदार रास्तों से गुजरा। बचपन में ही अस्थमा की बीमारी के चलते वो बहुत बीमार रहती थीं और घर में गरीबी का डेरा था।
पटना के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय, शास्त्रीनगर से बारहवीं पास अर्चना ने पटना यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी ऑनर्स किया है। लेकिन इसी बीच ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते समय साल 2005 में उनके पिता गौरीनंदन प्रसाद की असामयिक मृत्यु हो गई।
मूल रूप से पटना के धनरूआ थाना अंतर्गत मानिक बिगहा गांव की अर्चना अपने गांव में 'जज बिटिया' के नाम से मशहूर हो रही हैं। चार भाई-बहन में सबसे बड़ी अर्चना के लिए ये सफर जिंदगी के बहुत घुमावदार रास्तों से गुजरा। बचपन में ही अस्थमा की बीमारी के चलते वो बहुत बीमार रहती थीं और घर में गरीबी का डेरा था।
पटना के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय, शास्त्रीनगर से बारहवीं पास अर्चना ने पटना यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी ऑनर्स किया है। लेकिन इसी बीच ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते समय साल 2005 में उनके पिता गौरीनंदन प्रसाद की असामयिक मृत्यु हो गई।
अर्चना कुमारी
- फोटो : social media
अर्चना बताती हैं, "बहुत मुश्किल था क्योंकि सबसे बड़ी होने के नाते भाई-बहनों की जिम्मेदारी थी। चूंकि मैंने कंप्यूटर सीखा था तो मैंने अपने ही स्कूल में कंप्यूटर सिखाना शुरू किया ताकि घर खर्च में मदद की जा सके। तीन बहनें थीं तो घरवालों पर शादी का बहुत दबाव था। 21 साल की उम्र में मेरी शादी कर दी गई और मैंने भी खुद को समझा लिया कि मेरी पढ़ाई का अंत अब हो गया।"
लेकिन छह साल की उम्र से ही जज बनने का सपना देख रही अर्चना खुशकिस्मत निकलीं।
उनके पति राजीव रंजन ने उन्हें उनके सपनों को पूरा करने में मदद की। 2006 में अर्चना की शादी हुई थी।
पति ने उनमें पढ़ने की ललक दिखी तो साल 2008 में पुणे विश्वविद्यालय में अर्चना ने एलएलबी कोर्स में दाखिला ले लिया।
लेकिन छह साल की उम्र से ही जज बनने का सपना देख रही अर्चना खुशकिस्मत निकलीं।
उनके पति राजीव रंजन ने उन्हें उनके सपनों को पूरा करने में मदद की। 2006 में अर्चना की शादी हुई थी।
पति ने उनमें पढ़ने की ललक दिखी तो साल 2008 में पुणे विश्वविद्यालय में अर्चना ने एलएलबी कोर्स में दाखिला ले लिया।
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अर्चना बताती हैं, "मेरी पूरी पढ़ाई हिंदी माध्यम से थी, इसलिए रिश्तेदारों ने कहा कि मैं जल्द ही पुणे यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी माहौल से भाग आऊंगी. वो बार-बार कहते थे कि मेरे पति गोइठा में घी सुखा रहे हैं। मेरे सामने अंग्रेजी में तो पढ़ाई करने की चुनौती तो थी ही, और बिहार से पहली बार बाहर निकली थी।"
2011 में कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो पटना वापस आईं तो गर्भवती हो गईं।
2011 में कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो पटना वापस आईं तो गर्भवती हो गईं।
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साल 2012 में उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चे की पैदाइश के बाद की जिम्मेदारी बड़ी थी। लेकिन अर्चना ने अपने सपनों और मां की जिम्मेदारी का संतुलन साधा।
वो अपने 5 माह के बच्चे और अपनी मां के साथ आगे की पढ़ाई और तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं।
यहां उन्होंने एलएलएम की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की और साथ ही अपनी आजीविका के लिए कोचिंग में कानून के छात्रों को पढ़ाया भी।
अर्चना की सफलता में उनके पूरे परिवार का सहयोग है।
वो अपने 5 माह के बच्चे और अपनी मां के साथ आगे की पढ़ाई और तैयारी के लिए दिल्ली चली गईं।
यहां उन्होंने एलएलएम की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की और साथ ही अपनी आजीविका के लिए कोचिंग में कानून के छात्रों को पढ़ाया भी।
अर्चना की सफलता में उनके पूरे परिवार का सहयोग है।
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