करोलबाग स्थित होटल अर्पित पैलेस में आग की घटना को तीन साल बीत चुके हैं। लेकिन, होटल की काली दीवारें व खिड़कियों के टूटे शीशे आज भी उस दर्दनाक हादसे की दास्तां बयां कर रहे हैं, जिसमें 17 बेकसूर लोगों की जान चली गई थी। आसपास के लोगों का कहना है कि जैसे ही निगाह होटल की ओर जाती है तो बेकसूरों की चीख पुकार कानों में गूंजने लगती है और आखों में खौफनाक मंजर उतर आता है। आज भी वह काली रात भूले नहीं भूली जाती है।शनिवार को होटल अर्पित पैलेस में आग की घटना को तीन साल पूरे हो गए हैं। वर्ष 2019 में तड़के 12 फरवरी को होटल में आग लग गई थी, जिसमें यहां रूके 17 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं, कई पर्यटक गंभीर रूप से झुलस गए थे। घटना पर संज्ञान लेते हुए नगर निगम की ओर से होटल को सील कर दिया गया था। साथ ही दिल्ली में सभी होटलों में फायर एनओसी को लेकर भी जांच के आदेश दिए गए थे।
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होटल अर्पित पैलेस
- फोटो : अमर उजाला
होटल के सामने चाय की दुकान चलाने वाले ब्रिजेश कहते हैं कि वह बीते कई सालों से यहां चाय की दुकान चला रहे हैं। होटल आने वाले लोग कई बार चाय पीने के लिए उनकी दुकान पर भी पहुंच जाते थे।
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होटल अर्पित
- फोटो : अमर उजाला
घटना वाले दिन जब सुबह दुकान पर पहुंचे तो होटल के चारों ओर चीख पुकार मची हुई थी। हर तरफ पुलिस व दमकल विभाग की गाड़ियां और एंबुलेंस की गाड़ियों की जमावड़ा था। लोगों को होटल से बाहर निकालने के लिए मुख्य दरवाजे के अलावा खिड़कियों के कांच को तोड़ा जा रहा था। कुछ लोगों को होटल के दूसरी तरफ से बाहर निकाला गया था। लेकिन, आज भी उन बेकसूर 17 लोगों की दर्दनाक मौत के मंजर के बारे में सोचते ही रूह कांपने लगती है।
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होटल अर्पित
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वहीं, बीते छह सालों से होटल के पास पार्किंग का काम कर रहे दीपक ने बताया कि आग लगने के बाद से पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। माहौल इतना भयावह था कि लोग यहां से गुजरने से परहेज करते थे। आसपास के इलाकों में कई दिनों तक सन्नाटा पसर गया था। अब तीन साल से होटल बंद है और तब से यहां कोई आया भी नहीं है।
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होटल अर्पित पैलेस
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होटल के 38 कमरों में थे देशी-विदेशी पर्यटक
करीब 400 वर्गमीटर निर्मित होटल में 46 कमरे हैं। इसमें से घटना के वक्त 38 कमरों में देशी-विदेशी पर्यटक व 25 होटलकर्मी मौजूद थे। तड़के साढ़े तीन बजे के बाद कमरा नंबर 109 से आग फैलना शुरू हुई थी। ऐसे में होटल में मौजूद सभी लोगों ने जान बचाने के लिए छत का रूख किया था। छत के ऊपर फाइबर शीट लगाकर निर्माण किया गया था। इससे आग को फैलने में और मदद मिल गई थी। आग से बचने के लिए कुछ पर्यटकों ने होटल की इमारत से छलांग भी लगाई थी। वहीं, कुछ पर्यटक तारों के सहारे लटककर नीचे उतरे थे।