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गाजीपुर के 'रण' तक कैसे पहुंचा सिंघु बॉर्डर का 'संग्राम', 69 दिन में कितना बदल गया किसान आंदोलन?

Thu, 04 Feb 2021 02:58 PM IST
kumar sambhava कुमार संभव
Updated Thu, 04 Feb 2021 02:58 PM IST
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Farmer Protest How shifted to west up ghazipur border from punjab singhu border know all thing about protest after 69 days
किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला

26 नवंबर 2020...वह दिन, जब कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने मोर्चा खोल दिया और दिल्ली के सिंघु बॉर्डर से 'संग्राम' शुरू कर दिया। किसानों-सरकार के बीच एक-एक करके 11 दौर की बातचीत हुई। इस दौरान सरकार बैकफुट पर भी दिखी और डेढ़ साल तक कानून निलंबन का प्रस्ताव ले आई। हालांकि, किसान कानून वापसी की मांग पर डटे रहे। फिर 26 जनवरी के दिन दिल्ली में हुई हिंसा ने आंदोलन का रुख ही बदल दिया। किसान नेता राकेश टिकैत की धमकी, फिर हिंसा और आखिर में आंसुओं ने आंदोलन को नई धार दे दी। ...और सिंघु बॉर्डर पर शुरू हुआ यह संग्राम गाजीपुर के 'रण' तक पहुंच गया। इस दौरान क्या-क्या हुआ? शुरुआत में एक तरफ नजर आ रहे राकेश टिकैत कैसे इस आंदोलन के मुखिया बन गए और 69 दिन में यह आंदोलन कितना बदल गया...रूबरू होते हैं इस रिपोर्ट में...

तीन दिन का कूच बना 'बड़ी जंग' 

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किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
किसानों के आंदोलन को भले ही 69 दिन बीत चुके हैं, लेकिन शुरुआत में किसी ने सोचा तक नहीं था कि यह लड़ाई इतनी लंबी हो जाएगी। दरअसल, किसान तो 26 से 28 नवंबर तक के लिए दिल्ली कूच पर निकले थे। जगह-जगह उन्हें रोकने का इंतजाम किया गया। फोर्स तैनात की गई। बैरिकेड लगाए गए। यहां तक कि हौसला तोड़ने के लिए वॉटर कैनन और आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया गया। लेकिन कहते हैं न कि जय जवान के बाद जय किसान आता है। यानी बहादुरी के मामले में जवानों से किसी भी कीमत पर कम नहीं और हौसला उनसे भी कहीं ज्यादा। ....तो किसान डरे नहीं, बल्कि डट गए। 

 

सिंघु बॉर्डर बना 'संग्राम' का मैदान

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सिंघु बॉर्डर पर पहुंचा वाहनों का काफिला - फोटो : अमर उजाला
26 नवंबर को शुरू हुआ दिल्ली कूच 27 नवंबर तक हिंसक झड़प में तब्दील हो गया। जगह-जगह किसानों ने पुलिस की घेराबंदी तोड़ दी और दिल्ली की ओर बढ़ना जारी रखा। धीरे-धीरे 35 हजार से ज्यादा किसान दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर पहुंच गए और डेरा डाल दिया। उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से ही बात करेंगे। उनसे बात हुए बिना हम यहां से नहीं हटेंगे। इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान भी गाजीपुर बॉर्डर पर जम गए, लेकिन सिंघु बॉर्डर आंदोलन की मुख्य धुरी बना रहा।
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'मिनी पंजाब' बना सिंघु बॉर्डर

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सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसान - फोटो : amar ujala
दरअसल, किसान आंदोलन की शुरुआत पंजाब के किसानों ने की थी। सिंघु बॉर्डर पर जब उन्होंने पहली बार डेरा डाला तो करीब छह महीने तक टिके रहने का इंतजाम कर लिया। ऐसे में सिंघु बॉर्डर मिनी पंजाब जैसा नजर आने लगा। दरअसल, यहां किसान हर तरफ नगाड़े बजाते नजर आते। वहीं, लंगर और साथ में कृपाण के दर्शन आम हो गए थे। 
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पहली बैठक के बाद ऐसे थे हालात

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किसान नेताओं और सरकार की बैठक - फोटो : अमर उजाला
कृषि कानूनों को लेकर किसानों और केंद्र सरकार के बीच पहली बैठक एक दिसंबर 2020 को हुई थी। इस दौरान कई घंटे तक दोनों पक्षों के बीच दिल्ली के किसान भवन में बातचीत हुई, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। अहम बात यह थी कि उस बैठक को राकेश टिकैत ने सकारात्मक बताया था, जबकि पंजाब के किसान संगठनों ने निराशाजनक। 
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