कोरोना महामारी के बीच जहां मरीज ऑक्सीजन और अस्पतालों में बिस्तर पाने के लिए तड़प रहे हैं। वहीं प्राइवेट अस्पताल भी लोगों से फोन पर झूठ बोलते जा रहे हैं। इन अस्पतालों की ओर से न तो सरकार को बिस्तरों की सही जानकारी दी जा रही है और न ही अस्पताल के सही फोन नंबर दिए जा रहे हैं। स्थिति ऐसी है कि अगर कोई मरीज फोन पर इन अस्पतालों में बिस्तरों के लिए संपर्क करे तो उसे बेड खाली न होने का हवाला दिया जाता है लेकिन उसी अस्पताल में रात को अन्य मरीज को बिस्तर मिल जाता है।
ग्राउंड रिपोर्ट: प्राइवेट अस्पतालों में रात को हो रहा बड़ा खेल, फोन पर बोल रहे झूठ, मौके पर मिल रहा बिस्तर
कोरोना महामारी के बीच जहां मरीज ऑक्सीजन और अस्पतालों में बिस्तर पाने के लिए तड़प रहे हैं। वहीं प्राइवेट अस्पताल भी लोगों से फोन पर झूठ बोलते जा रहे हैं। इन अस्पतालों की ओर से न तो सरकार को बिस्तरों की सही जानकारी दी जा रही है और न ही अस्पताल के सही फोन नंबर दिए जा रहे हैं।
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समाज सेवा की आड़ में बिस्तरों की सेटिंग
रविवार रात एक बजे दिल्ली के मधुकर रेनबो अस्पताल ने फोन पर बिस्तर एक भी खाली नहीं होने का हवाला दिया लेकिन रात 2.30 बजे उन्होंने दो गर्भवती महिलाओं को भर्ती भी किया। यहां मौजूद विनोद नगर निवासी विकास कुमार ने बताया कि उनके सामने ही दो लोग सफेद कुर्ता पहन वहां आए और चंद मिनट में उनके मरीजों को भर्ती कर लिया। पूछने पर पता चला कि वे सोशल मीडिया पर मरीजों की मदद कर रहे हैं। ठीक इसी तरह साकेत मैक्स, बीएलके, फोर्टिस शालीमार बाग में भी घटनाएं देखने को मिलीं। यहां फोन पर पूछे जाने पर बिस्तर भरे होने की जानकारी दी गई लेकिन आपातकालीन वार्ड में मौजूद तीमारदारों से पता चला कि रात में बेड खाली होने के बाद इन्होंने फोन करके मरीजों को बुलाया और उन्हें भर्ती कर लिया। इन अस्पतालों से जब मरीजों के भेदभाव को लेकर सवाल किए गए तो वहां मौजूद स्टाफ ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
आधे से ज्यादा अस्पतालों के फोन ही खामोश
दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर हर अस्पताल के फोन नंबर दिए हैं। इन नंबर पर जब कोई व्यक्ति कॉल करता है तो ज्यादातर खामोश ही मिलते हैं। या तो स्विच ऑफ रहते हैं या फिर व्यस्त। गौर करने वाली बात है कि प्राइवेट अस्पतालों ने सरकार को अपने नंबर भी गलत दिए हैं क्योंकि इंटरनेट पर मौजूद इनकी वेबसाइट पर नंबर कुछ और ही हैं। जैसे रोहिणी के श्राइन अस्पताल का इंटरनेट पर नंबर 091024 86016 है लेकिन सरकार की वेबसाइट पर 011-27290925 नंबर दिया है। दिल्ली एम्स और ट्रामा सेंटर के नंबर भी सरकार ने दिए हैं लेकिन शाम सात बजे के बाद इनमें से एक पर भी जवाब नहीं मिलता। ठीक इसी तरह मेट्रो अस्पताल, आर्य अस्पताल सहित कई जगह वेबसाइट पर दिए नंबर खामोश ही मिले।
गुरुग्राम-नोएडा सहित एनसीआर में भी ऐसे हालात
दिल्ली की तरह गुरुग्राम, नोएडा सहित एनसीआर के शहरों में भी हालात अलग नहीं है। ग्रेटर नोएडा निवासी डॉ. आदिल की तबियत बिगडने पर नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा तक के अस्पतालों में फोन किया गया लेकिन सभी ने बिस्तर न होने का हवाला दिया। जब परिजनों ने अस्पतालों के चक्कर लगाना शुरू किया तो चौहान अस्पताल में उन्हें ऑक्सीजन बिस्तर मिल गया लेकिन मरीज की हालत बिगडने की वजह से आईसीयू नहीं मिला और डॉ. आदिल ने दम तोड़ दिया। रोहतक, सोनीपत, पलवल और बुलंदशहर तक के अस्पतालों में इस समय आईसीयू बेड और वेंटिलेटर की किल्लत है। यहां के जिला प्रशासन ने बिस्तरों की सही जानकारी देने के आदेश तक दिए हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा।
सरकार का दावा 25 खाली
अस्पतालों के नंबर बंद, जाकर पूछा तो पता चला एक भी खाली नहीं
दिल्ली में कुल वेंटिलेटर 1802
सरकार का दावा, आर्य नगर अस्पताल में दो खाली
इंटरनेट पर नंबर लेकर पूछा तो एक भी खाली नहीं