राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी की इमारत गिरने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। छात्रों के लिए मौत का घर बनी पांच मंजिला इमारत के बेसमेंट में पिछले तीन दिनों से निर्माण कार्य चल रहा था। लगातार बारिश के बीच जर्जर इमारत को खाली कराए बिना बेसमेंट में भराव और मरम्मत का काम कराया जा रहा था। न निर्माण के दौरान सुरक्षा के इंतजाम किए गए और न ही भवन की संरचनात्मक मजबूती की जांच कराई गई। आखिरकार कमजोर इमारत निर्माण का दबाव नहीं झेल सकी और भरभराकर ढह गई।
2 of 14
दिल्ली में इमारत गिरी, बचाव कार्य जारी
- फोटो : अमर उजाला
स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे से पहले छात्रों ने भी बेसमेंट में चल रहे काम पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि लगातार बारिश हो रही है, ऐसे में बेसमेंट की मरम्मत और भराव का काम मौसम साफ होने के बाद कराया जाना चाहिए।
3 of 14
दिल्ली में इमारत गिरी, बचाव कार्य जारी
- फोटो : अमर उजाला
आरोप है कि संचालक ने चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। बताया जा रहा है कि बेसमेंट में भराव पूरा होने के बाद वहां दुकान खोलने की योजना थी। सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब इमारत पहले से जर्जर थी तो उसे खाली कराए बिना उसके बेसमेंट में निर्माण क्यों शुरू कराया गया?
4 of 14
दिल्ली में इमारत गिरी, बचाव कार्य जारी
- फोटो : अमर उजाला
बेसमेंट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले भवन की संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन भी नहीं कराया गया। बारिश के दौरान बेसमेंट में निर्माण ने पहले से कमजोर ढांचे पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया।
5 of 14
दिल्ली में इमारत गिरी, बचाव कार्य जारी
- फोटो : अमर उजाला
रिफ्यूजी कैंप बना तो 90 गज में मकान बने...अब 90 गज में पांच-छह मंजिला इमारतें
स्थानीय निवासियों के अनुसार सत्य निकेतन में मूल रूप से छोटे-छोटे मकान थे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय यहां रिफ्यूजी कैंप बसाया गया था और करीब 90 गज में मकान बनाए गए थे। मैत्रेयी कॉलेज की स्थापना और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के इस क्षेत्र में स्थानांतरित होने के बाद इलाके का तेजी से विस्तार हुआ। पुराने रिहायशी मकानों में पीजी और हॉस्टल खुलने लगे।