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ये हैं वो 3 कारण जिसने समाजवादी पार्टी को दिलाई इतनी शर्मनाक हार  

Sun, 03 Dec 2017 01:20 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 03 Dec 2017 01:20 PM IST
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Why samajwadi party got defeat in nikay chunav 2017 in up

उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव के नतीजे आने शुरू हो गए हैं और परिणाम तथा रुझान इस ओर साफ संकेत कर रहे हैं कि बीजेपी अपने प्रतिद्वंदियों को करारी शिकस्त दे रही है। इस चुनाव में जिस बात ने सबको चौंकाया है वह मायावती की पार्टी बहुजन समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन है। लेकिन चुनावी नतीजों ने सबसे ज्यादा समाजवादी पार्टी को निराश किया है। आठ महीने पहले तक सत्ता में रहने वाली सपा एक भी नगर निगम में मेयर का पद जीतती नहीं दिख रही है। समाजवादी पार्टी की इस करारी हार के पीछे तीन प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं...

Why samajwadi party got defeat in nikay chunav 2017 in up

परिवारवाद ने डुबाया: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी के तत्कालीन मुखिया मुलायम सिंह यादव के परिवार में उनके बेटे अखिलेश यादव और भाई शिवपाल यादव के बीच शुरू हुई जंग ने पार्टी को खासा नुकसान पहुंचाया। माना जा रहा है कि अभी भी पार्टी का काडर इस बात को लेकर दुविधा में है कि आखिर पार्टी का असल मुखिया कौन है और पारिवारिक जंग का अंतिम परिणाम क्या होगा। कुल मिलाकर मुलायम यादव कुनबे की आंतरिक राजनीति और कलह को उनके पतन का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

Why samajwadi party got defeat in nikay chunav 2017 in up
- फोटो : अमर उजाला

चुनाव प्रचार में नहीं दिखाया दम: यूपी निकाय चुनाव में भाजपा की जीत के पीछे उनकी रणनीति और चुनावी तैयारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने स्थानीय निकाय के इस चुनाव को भी पूरी गंभीरता से लड़ा। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निकाय चुनाव के दौरान 40 जनसभाएं कीं और प्रदेश अध्यक्ष ने भी उनका पूरा साथ दिया। जबकि समाजवादी पार्टी ने बेमन से ये चुनाव लड़ा। चुनाव प्रचार के दौरान अखिलेश और मुलायम ने कोई उत्साह नहीं दिखाया जिसका सीधा असर परिणामों पर दिख रहा है।

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नोटबंदी ने निकाली हवा: नोटबंदी को एक साल पूरे होने के बाद यूपी में निकाय चुनाव की शुरुआत हुई जिसने भाजपा विरोधियों के लिए चुनावी खर्चे को सीमित रखने पर मजबूर कर दिया। नोटबंदी और आधार की अनिवार्यता ने चुनाव में पैसों की अवैध आमद और खर्च को नियंत्रित कर दिया जिसका सीधा असर समाजवादी पार्टी और बसपा दोनों पर दिखाई दे रहा है।

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