इन्हें देख आप खुद ही करें फैसला, भरोसा करना है या नहीं
अगर आप कीमती सामान लेकर शहर के बाजार में घूम रहे हैं तो जगह-जगह मुस्तैद दिखाई दे रहे पुलिसकर्मियों पर भरोसा नहीं कीजिएगा। यह वर्दीधारी झपटमारी कर भाग रहे बदमाशों का पीछा नहीं कर सकेंगे। (सभी फोटोः ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/अमर उजाला, फरीदाबाद)
इन्हें देख आप खुद ही करें फैसला, भरोसा करना है या नहीं
वजह इनमें से अधिकतर मोटापे व अन्य बीमारियों का शिकार हैं और इनके स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए विभाग की ओर से कुछ नहीं किया जा रहा।
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डीसीपी रैंक के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सिपाही और एएसआई रैंक के पुलिसकर्मियों को नियुक्ति से पहले तीन माह की ट्रेनिंग दी जाती है। नौकरी में आने के बाद शारीरिक फिटनेस बनाए रखना पुलिस वालों की जिम्मेदारी होती है।
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ड्यूटी के अनियमित घंटे, भोजन का अनिश्चित समय और काम की अधिकता के चलते अधिकतर पुलिस वाले फिटनेस पर ध्यान नहीं दे पाते और बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। नियमित एक्सरसाइज नहीं कर पाने की वजह से इनमें मोटापा, हाई ब्लडप्रेशर, तनाव, पेट की बीमारियां आम हैं। उन्होंने बताया कि 40 साल से ऊपर की उम्र वाले अधिकतर पुलिसकर्मी अनफिट हैं।
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उनके मुताबिक लगभग दस फीसदी पुलिस वाले मोटापे का शिकार हैं जबकि बीस फीसदी से ज्यादा अनफिट की श्रेणी में आते हैं। बताते हैं कि शहर में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं जिसमें बदमाश पुलिस वालों के सामने चेन, पर्स, मोबाइल आदि झपट कर फरार हो गए। अनफिट शरीर और तोंद के चलते यह पुलिस वाले बदमाशों के पीछे भाग ही नहीं सके।