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निर्भया केस: उन अंतिम 11 दिनों की कहानी, जब वह खुद दर्द में थी पर मां को कराया शांत

Wed, 11 Mar 2020 11:36 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 11 Mar 2020 11:36 AM IST
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Nirbhaya case tale of those last 11 days when protests were outside she battling for life
- फोटो : अमर उजाला

वो 16 दिसंबर 2012 की काली रात थी। रात के करीब 11 बजे थे जब 23 साल की युवती को सफदरजंग अस्पताल में लाया गया था। वह बुरी तरह से घायल थी और खूब खून बह रहा था। वह रह-रह कर बेहोश हो रही थी और उसके पूरे शरीर पर उस ठिठुरती रात में सिर्फ एक कपड़ा लिपटा हुआ था। वह जैसे ही अस्पताल के एक वार्ड में पहुंची तुरंत उस कमरे के सभी पर्दे लगा दिए गए और नर्सों ने उसे अस्पताल की चादर से ढंक दिया और इसके बाद पहुंचे कुछ डॉक्टर। निर्भया की जिंदगी के उन अंतिम 11 दिनों की कहानी जब वह सफदरजंग अस्पताल में भर्ती थी और कैसे डॉक्टर भी उसकी हिम्मत का लोहा मानने को हुए मजबूर....


 

Nirbhaya case tale of those last 11 days when protests were outside she battling for life
- फोटो : अमर उजाला

यह युवती थी निर्भया जो 16 दिसंबर से लेकर अगले 11 दिनों तक सफदरजंग अस्पताल में ही रही, जब तक वह सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में नहीं चली गई। आज भी उसका इलाज करने वाले डॉक्टर उसे भूले नहीं हैं। वह कहते हैं कि वो पहला एक्स-रे था जिसने हमें उसके साथ हुई बर्बरता से काफी हद तक अवगत कराया। हमने निर्भया के पेट का एक बेसिक एक्स-रे किया था, जिसे देखकर हम चौंक गए थे क्योंकि उस रिपोर्ट में युवती की आंत ही नहीं दिखाई दी थी।

Nirbhaya case tale of those last 11 days when protests were outside she battling for life
निर्भया केस के दोषियों को प्रतीकात्मक रूप से फांसी पर लटकाया। - फोटो : अमर उजाला।

डॉक्टर ने आगे बताया कि मैं ये समझ ही नहीं पा रहा था कि उसकी आंत को क्या हुआ। मुझे लगा था कि मशीन को या तो रिपेयर की जरूरत है या फिर मैं ही अंधा हो गया हूं। एक्स-रे में देखा गया कि निर्भया के शरीर में मुश्किल से दो-तीन इंच ही आंत बची थी जबकि सामान्य दशा में एक महिला के शरीर में 20-22 फीट लंबी आंत होती है। एक्स-रे रिपोर्ट आने के बाद तुरंत वरिष्ठ सर्जनों को बुलाया गया और युवती को सर्जरी के लिए ले जाया गया ताकि उसके आंतरिक घावों का भी परीक्षण किया जा सके। 17 दिसंबर की रात दो बजे तक लगातार तीन घंटे की लंबी प्रक्रिया के बाद डॉक्टरों को पता चला कि पीड़िता का शोषण करते वक्त उसके शरीर से आंत ही निकाल ली गई थी।

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Nirbhaya case tale of those last 11 days when protests were outside she battling for life
nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला

सफदरजंग की ही एक महिलारोग विशेषज्ञ ने एक बार कहा था कि यह केस रेप केस से कहीं ज्यादा था। दुष्कर्म और सामूहिक दुष्कर्म के मामलो में भी हम यही देखते हैं कि पीड़िता के नाजुक अंगों में चोटें आती हैं। यहां तक कि वे बहुत गंभीर दुर्बल करने वाली चोटें हैं। लेकिन ऐसा मामला जहां मरीज की पूरी आंत बाहर निकाली गई थी, ऐसा हमने पहले कभी नहीं देखा था, भले ही हमारे पास सबसे बड़ा स्त्री रोग विभाग हो।

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Nirbhaya case tale of those last 11 days when protests were outside she battling for life
nirbhaya case - फोटो : सोशल मीडिया

सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल सुपरीटेंडेंट रहे बीडी अथानी ने एक बार कहा था कि डॉक्टरों ने इंफेक्शन रोकने के लिए पांच सर्जरी की। यह एक जबरदस्त प्रयास था, इसीलिए जब हम उसे बचा नहीं पाए तो ऐसा शून्य छोड़ दिया। डॉक्टरों को आज भी निर्भया के लड़ने का जज्बा याद है। अस्पताल की नर्सें बताती हैं कि पहली सर्जरी के बाद ही वह अलर्ट हो गई थी और उसने अपने मोबाइल फोन और क्रेडिट कार्ड के बारे में पूछा था।

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