नैना साहनी कांडः जानिए क्या थी उस खौफनाक रात की कहानी, जब तंदूर में जलाई गई एक लाश
- 3 जुलाई, 1995 का है मामला
- दोषी सुशील कुमार को मिली रिहाई
- पूर्व युवा कांग्रेस नेता था सुशील कुमार
- बीवी की हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए अपने रेस्तरां के तंदूर में जलाया
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1995 के बहुचर्चित तंदूर कांड में दोषी ठहराए गए सुशील शर्मा को शुक्रवार रात 8.30 बजे तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। इससे पहले, दिन में दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा माफी बोर्ड (एसआरबी) की सिफारिशों को खारिज करते हुए यूथ कांग्रेस के पूर्व नेता सुशील शर्मा को तुरंत रिहा करने का आदेश दे दिया था। रिहाई के समय सुशील के वकील उसके साथ थे।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने कहा कि सुशील अपनी सजा काट चुका है। उसे और जेल में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने दिल्ली सरकार के एसआरबी के 4 अक्तूबर, 2018 के फैसले को खारिज करते हुए केवल दो पन्नों का निर्णय दिया। कोर्ट विस्तृत निर्णय बाद में सुनाएगा। इससे पहले, कोर्ट ने उसकी याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा था कि याची 23 साल से अधिक समय से जेल में है। वह अपनी सजा पूरी कर चुका है। क्या उसे जेल में रखना मानवाधिकारों का हनन नहीं है? कोर्ट ने सुशील की रिहाई पर आपत्ति जताने पर एसआरबी को भी आड़े हाथ लिया।
एसआरबी की 4 अक्तूबर की सिफारिश के आधार पर उपराज्यपाल ने सुशील की जल्द रिहाई का आदेश नहीं दिया था। वहीं, एसआरबी ने अपनी रिपोर्ट में सुशील को रिहा करने पर समाज को कोई खतरा नहीं होने की बात कही थी। याचिका पर जिरह करते हुए सुशील के वकील अमित साहनी ने कहा कि वह साढ़े 23 साल की सजा काट चुका है, जबकि उसे 20 साल की सजा के बाद रिहा कर दिया जाना चाहिए था।
याचिका में शर्मा ने कहा कि दोषियों को जल्दी रिहा करने संबंधी दिशानिर्देश के मुताबिक, एक अपराध में उम्रकैद काट रहे दोषी को 20 साल और एक से अधिक अपराध में उम्रकैद काट रहे दोषी को 25 साल पूरे होने के बाद रिहा करने पर विचार किया जाना चाहिए। जानिए क्या है उस भयावह रात की कहानी और कैसे एक कातिल बन गया पुजारी...
3 जुलाई, 1995, रात का एक बज चुका था। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मैक्सवेल परेरा के फोन की घंटी बजी। उन्हें फोन पर बताया गया कि अशोक यात्री निवास होटल के तंदूर में एक शव को जलाने की कोशिश की गई है।
परेरा के अनुसार, नैना साहनी की बुरी तरह से जली हुई लाश बगिया के किचन के फर्श पर पड़ी हुई थी। उसको एक कपड़े से ढका गया था। बगिया रेस्तरां के मैनेजर केशव कुमार को पुलिस वालों ने पकड़ रखा था। नैना के शरीर का मुख्य हिस्सा जल चुका था। सिर्फ नैना का जूड़ा था जो पूरी तरह से नहीं जला पाया था। आग की गर्मी की वजह से उनकी अतड़ियां पेट फाड़ कर बाहर आ गई थीं।
अगर लाश आधे घंटे और जलती तो कुछ भी शेष नहीं रहता और जांच करने में बहुत मुश्किल आती। जब नैना साहनी का शव जलाने में दिक्कत आई तो सुशील शर्मा ने बगिया के मैनेजर केशव को मक्खन के चार स्लैब लाने के लिए भेजा।
उस समय कनॉट प्लेस थाने के एसएचओ निरंजन सिंह बताते हैं, "नैना साहनी के शव को तंदूर के अंदर रख कर नहीं बल्कि तंदूर के ऊपर रख कर जलाया जा रहा था, जैसे चिता को जलाते हैं।" कांस्टेबल कुंजू ने सबसे पहले जली लाश देखी थी। उस रात 11 बजे वह जनपथ पर गश्त लगा रहे थे।
तभी उन्हें अशोक यात्री निवास के प्रांगण से आग की लपटें और धुआं उठता दिखाई दिया। आग देख जब वो बगिया रेस्तरां के गेट पर पहुंचा तो देखा कि सुशील शर्मा वहां खड़ा था और उसने गेट को कनात से घेर रखा था। जब कांस्टेबल कुंजू ने आग का कारण पूछा तो केशव ने जवाब दिया कि वो लोग पार्टी के पुराने पोस्टर जला रहे थे।
वह पहले तो आगे चले गए लेकिन फिर गड़बड़ होने के अंदेशे से रेस्तरां के पीछे की दीवार फांद तंदूर के पास पहुंचे। पहले उन्हें वहां जाने से रोका गया फिर पास गए तो देखा कि एक लाश जल रही है।
जब कांस्टेबल ने पूछा तो मैनेजर केशव ने कहा कि बकरा भून रहे हैं। जब कांस्टेबल ने उसे बल्ली से हिलाया तो पता चला कि वह महिला की लाश है। इसके बाद उसने अधिकारियों को फोन कर घटना की जानकारी दी।
सुशील को नैना पर शक था जिसके चलते उसने उसे गोली मार दी फिर उसकी लाश को पॉलीथीन में पैक किया फिर कपड़े में लपेटा लेकिन उठा नहीं पाया तो घसीट कर कमरे से अपनी कार तक ले गया।
सुशील नैना को मारने के बाद उसे यमुना में फेंक देना चाहता था लेकिन फिर उसे लगा कि कोई देख न ले तो उसने अपने ही रेस्तरां में नैना के शव को जलाने की सोच ली। सुशील शर्मा और नैना साहनी दोनों मंदिर मार्ग के फ्लैट-8ए में मियां-बीवी की तरह रहते थे। लेकिन उन्होंने उस शादी को सब के लिए सामाजिक तौर पर उजागर नहीं किया था।
नैना सुशील पर लगातार दबाव बना रही थी कि इस शादी को उजागर करो। इस बात से दोनों में मनमुटाव शुरू हो गए। बता दें कि यह पहला मामला था जिसकी जांच में पहली बार डीएनए और स्कल इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। अपनी सजा के दौरान सुशील काफी बदल गया और वो जेल में पुजारी का काम करता था।