जेपी समूह के हजारों निवेशक पजेशन के लिए सड़कों पर उतर पड़े हैं। वहीं, जिन्हें फ्लैट मिल चुका है वह भी वहां रहने से कतरा रहे हैं। वजह, फ्लैटों में सुविधाओं का अभाव और अधिकतर फ्लैट आधे-अधूरे बने होने और खाली रहने से लगने वाला डर है। दरअसल, जेपी समूह को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 32000 फ्लैट बनाकर देने थे, लेकिन केवल 5500 फ्लैट का पजेशन हो पाया है।
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जेपी बिल्डर के बनाए घरों में एक 'डर' के चलते नहीं रहना चाहते लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Mon, 21 Aug 2017 04:42 PM IST
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जेपी ग्रीन्स विश टाउन
- फोटो : अमर उजाला
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जेपी ग्रीन्स विश टाउन
- फोटो : अमर उजाला
लिहाजा, इतने लोग उसके दिए गए फ्लैट में रह रहे हैं, लेकिन केवल जेपी विश टाउन की बात की जाए तो वहां सैकड़ों टावर और हजारों फ्लैट बन रहे हैं। अधिकांश का काम आधा अधूरा है या ढांचा खड़ा है। ऐसे माहौल में जो निवेशक वहां रहे हैं उन्हें चिंता सता रही है। यही नहीं जो फ्लैट बने हुए हैं। उसमें भी कई खामियां वहां रहने वाले गिना रहे हैं।
जेपी ग्रीन्स विश टाउन
- फोटो : अमर उजाला
यहां आज भी कई फ्लैट आधे-अधूरे हैं। जो पूरे हो गए हैं वहां रहने से लोग कतरा रहे हैं। यहां बताई गई सुविधाओं के अनुरूप कुछ भी नहीं है। कई वर्षों से लोगों को पजेशन नहीं मिला है और जिन्हें मिल गया है, उनके लिए यहां रहना मुश्किल है।
- परिमल तोमर, सोसाइटी अध्यक्ष, जेपी विशटाउन
- परिमल तोमर, सोसाइटी अध्यक्ष, जेपी विशटाउन
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jaypee greens
- फोटो : social media
बेटी को फ्लैट मिल गया है, लेकिन फ्लैट की हालत बहुत खराब है। कहा कुछ गया था मिला कुछ और है। मेरे नाम से जो फ्लैट बुक कराया है वह नहीं मिला है। लिहाजा, बेटी के साथ फ्लैट शेयर करने की मजबूरी है। फ्लैट की हालत इतनी खराब है कि रहना मुश्किल हो रहा है।
- आशा पॉल, निवासी
- आशा पॉल, निवासी
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एनसीएलटी में भी चल रहा जेपी का मामला
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में भी जेपी का मामला चल रहा है, जिसमें बैंक की ओर से जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया कानून के तहत प्रक्रिया चलाने के लिए एनसीएलटी में याचिका डाली थी। जिसे एनसीएलटी ने मानते हुए आईआरपी नियुक्त कर दिया। इसके बाद जेपी इंफ्राटेक का बोर्ड भंग हो गया। इसके बाद जेपी समूह के निवेशकों में चिंता और भय का माहौल है।
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में भी जेपी का मामला चल रहा है, जिसमें बैंक की ओर से जेपी इंफ्राटेक को दिवालिया कानून के तहत प्रक्रिया चलाने के लिए एनसीएलटी में याचिका डाली थी। जिसे एनसीएलटी ने मानते हुए आईआरपी नियुक्त कर दिया। इसके बाद जेपी इंफ्राटेक का बोर्ड भंग हो गया। इसके बाद जेपी समूह के निवेशकों में चिंता और भय का माहौल है।