सपनों के शहर में उम्मीदें लेकर आए कामगार, उनके परिवार की महिलाएं और बच्चे लगभग पांच हजार लोग शानिवार को बिहार वापस लौट गए। सरकार और प्रशासन के प्रयास से दादरी और दनकौर से शनिवार को बिहार के औरंगाबाद, सासाराम (रोहतास), बख्सर और सिवार के लिए चार विशेष ट्रेन रवाना हुईं। देखें तस्वीरें...
52 दिन बाद उम्मीदों की ट्रेन में सवार हुए लगभग 5000 श्रमिक, लौटे बिहार
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दादरी और दनकौर से रेलवे स्टेशन ले जाए गए मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
प्रत्येक ट्रेन में लगभग 1500 यात्रियों की संख्या निर्धारित की गई थी। लेकिन यात्री समय पर नहीं पहुंचे, इसके चलते सभी ट्रेनों को देरी से रवाना करना पड़ा। इस दौरान पुलिस आयुक्त आलोक सिंह समेत पुलिस-प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और रेलवे के कई अधिकारी मौजूद रहे। सभी यात्रियों को भोजन पानी आदि का बंदोबस्त कराया गया।
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दादरी और दनकौर से रेलवे स्टेशन ले जाए गए मजदूर
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अफसरों के कड़े प्रयास के बावजूद यात्रियों के इंतजार करने और कतार में लगने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन भी देखा गया। लेकिन यात्रियों ने सरकार और प्रशासन के स्पेशल ट्रेन चलाने को लेकर सराहना की। दनकौर से सिवान के लिए रवाना होने वाली चौथी ट्रेन में काफी अधिक यात्री पहुंचे हैं और पुलिस-प्रशासन व्यवस्था बनाने के प्रयास में जुटा रहा।
52 दिन बाद उम्मीदों की ट्रेन में सवार हुए लगभग 5000 श्रमिक, लौटे बिहार
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दादरी और दनकौर रेलवे स्टेशन से ले जाए गए मजदूर
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सरकार और रेलवे मंत्रालय के निर्देश पर जिला प्रशासन ने दादरी से सुबह 11 बजे औरंगाबाद, दनकौर से दोपहर 12 बजे बख्सर और दादरी से दोपहर तीन बजे सासाराम और दनकौर से शाम चार बजे सिवान के लिए बिहार के प्रवासी मजूदरों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा की थीं।
52 दिन बाद उम्मीदों की ट्रेन में सवार हुए लगभग 5000 श्रमिक, लौटे बिहार
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दादरी और दनकौर रेलवे स्टेशन से ले जाए गए मजदूर
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इन ट्रेनों में घर जाने वाले प्रवासियों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना था और प्रशासन की ओर से भेजे जाने वाले मैसेज को रेल का टिकट माना गया था। यात्रियों को निर्धारित समय से दो घंटे पहले पहुंचना था। इस व्यवस्था के बाद शनिवार को दिन निकलते ही बिहार के प्रवासी मजदूर अपने परिवार की महिला और बच्चों को लेकर दादरी व दनकौर रेलवे स्टेशन पर पहुंचना शुरू हो गए।