मशहूर चिपको आंदोलन की तर्ज पर दिल्ली में भी लोग पेड़ों की कटाई को लेकर सड़कों पर बने हुए हैं। सेव 16500 ट्री ऑफ दिल्ली नाम के साझा अभियान में सैकड़ों लोग रविवार को सरोजनी नगर में एकजुट हुए। लोगों ने निर्णय लिया कि वे तब तक सांकेतिक और अंहिसात्मक विरोध करते रहेंगे, जब तक सरकार पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव वापस नहीं लेती।
दिल्ली चिपको आंदोलन: पेड़ों की कटाई के विरोध में किसी ने नाक नीला कराया तो किसी ने बांटे पौधे
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सरोजनी नगर पुलिस थाने के पास मौजूद पार्क में लोगों ने पेड़ों से चिपककर संदेश दिया कि यह पेड़ भी उनके परिवार के सदस्य हैं, इन्हें बिल्कुल भी कटने नहीं दिया जाएगा। वहीं, केंद्र और दिल्ली सरकार समेत उपराज्यपाल से अपील की गई कि पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव जल्द से जल्द वापस लिया जाए। इस साझा अभियान की संचालक प्रेरणा प्रसाद ने कहा कि दिल्ली के इस चिपको आंदोलन में बच्चों से लेकर बूढ़े तक सड़क पर हैं।
सिर्फ दो दिन में यह अभियान काफी फैल गया है। विदेश से लोग और पर्यावरणविद् भी इसे समर्थन दे रहे हैं। इनमें ग्रीन सर्कल, दिल्ली ब्लू स्काइज, चेतना, न्यू दिल्ली व पदमश्री अपर्णा कौर, पर्यावरणविद् विक्रांत तोंगड़ और अनिल सूद समेत स्थानीय नागरिकों ने भी पार्क के पास विरोध दर्ज कराया। इस साझा अभियान में यह रणनीति बनी है कि पेड़ों को अब नहीं कटने दिया जाएगा। सभी बारी-बारी निगरानी करेंगे। नुक्कड़ नाटक, कैंडल मार्च, दौड़ प्रतियोगिता और अन्य तरीके से पेड़ों की कटाई का विरोध जारी रहेगा।
- किसी ने नाक नीला कराया तो किसी ने बांटे पौधे
लोगों ने अपनी नाक को नीला पेंट कर विरोध दर्ज कराया। केईवाईएस (कौशल एडु-टेनमेंट यूथ एंड सोसायटी ट्रस्ट) के सलाहकार जोसेफ टी वर्गीज ने कहा कि नीली नाक के जरिए हम यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि यह पेड़ आक्सीजन का प्रमुख स्रोत हैं। वहीं बड़े पैमाने पर पेड़ कटेंगे तो आक्सीजन की कमी होगी। यदि शरीर को कम आक्सीजन मिलती है तो बदन नीला पड़ने लगता है। लिहाजा सांकेतिक तौर पर नाक को नीला कर विरोध दर्ज कराया जा रहा है। न्यू दिल्ली नेचर सोसायटी के जरिए लोगों को हरे फीते बांटे गए। ट्री मैन के नाम से मशहूर दीपक गौर ने लोगों से शपथ लिखाकर पौधे दिए।
- लोगों ने रखी अपनी राय
विरोध दर्ज कराने खेलगांव से आए 74 वर्षीय बिन्नी गुप्ता ने कहा कि उन्होंने सात वर्ष पूर्व सीरी फोर्ट में भी पेड़ों की कटाई का विरोध किया था। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए थे। इसके बाद पेड़ों की कटाई का फैसला सरकार को वापस लेना पड़ा था। वहीं, वसंत विहार निवासी विजय किवायत ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव बेहद ही अतार्किक है। सेव ट्रीज सेव से जुड़ी और गुरुग्राम निवासी ज्योति राघवन ने कहा कि वे इस विरोध में शामिल होने आई हैं। इन पेड़ों की कटाई का विरोध किया जाएगा। एनजीटी में मामला उठाने वाले अधिवक्ता और पर्यावरणविद् अनिल सूद ने कहा कि यह पूरी परियोजना ही बीमारू है। पर्यावरण मंजूरी से जुड़ी कई खामियां इसमें मौजूद हैं।