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कई विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली ये बाइकर अब डरी-सहमी बेटियों की करेंगी मदद

Fri, 22 Dec 2017 09:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 22 Dec 2017 09:49 AM IST
सार

डरी-सहमी बेटियों को रफ्तार दे सकती है बाइक: पल्लवी
-कई विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली महिला बाइकर पल्लवी ने अमर उजाला से की मन की बात 
-पश्चिम यूपी के हालात खराब, लिंगानुपात में भी है काफी पिछड़ा 
-महिलाओं की हर शिकायत को सुनती है 181 हेल्पलाइन 
अमर उजाला ब्यूरो 
नई दिल्ली।

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biker pallavi faujdar told to amar ujala how girls can fight against fear
- फोटो : जी पॉल

महिला हेल्पलाइन 181 व बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के प्रति जागरूकता के लिए निकली बाइक राइडर पल्लवी फौजदार का मानना है कि आज महिला सशक्तिकरण केवल शब्दों तक सिमट कर रहा गया है। इसलिए वे इसे जमीनी स्तर पर लाना चाहती हैं, जिसके लिए उन्होंने अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश को चुना है। वे कहतीं हैं कि एक वक्त था जब बाइक (मोटरसाइकिल) की पहचान पुरुषों से होती थी, लेकिन अब देश बदल रहा है। पुरुषों की बाइक अब डरी-सहमी बेटियों को रफ्तार दे रही है।

biker pallavi faujdar told to amar ujala how girls can fight against fear
- फोटो : जी पॉल

बाइक  राइडिंग में कई विश्व रिकॉर्ड बना चुकीं पल्लवी अमर उजाला के अभियान ‘सोच एक कदम आगे’ से खुद को जोड़ते हुए कहतीं हैं कि 28 दिसंबर से वे मथुरा, आगरा होते हुए कानपुर तक की यात्रा करेंगी। उन्होंने इस अभियान का नाम ‘गूंज’ दिया है, जिसमें अमर उजाला मीडिया पार्टनर की भूमिका में रहेगा। कुछ महीने पहले ही वे अपनी टीम के साथ लखनऊ, वाराणसी और इलाहाबाद की यात्रा कर चुकी हैं और अब 23 दिसंबर से पश्चिम यूपी के लिए रवाना होने वाली हैं।

biker pallavi faujdar told to amar ujala how girls can fight against fear
- फोटो : जी पॉल

अमर उजाला से मन की बात में पल्लवी ने कहा कि पेन इंडिया की हेल्पलाइन 181 से आज अधिकतर  महिलाएं अनजान है। यह हेल्पलाइन घरेलु हिंसा से लेकर अन्य सभी महिला अपराधों से जुड़े मामलों की निगरानी करती है। पीड़िता की काउंसलिंग के साथ उन्हें कानूनी सलाह भी देती है।

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biker Pallavi - फोटो : जी पॉल

​बावजूद इसके महिलाओं को इसकी जानकारी नहीं होना खटकता है। महिला सशक्तिकरण, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, भ्रूण लिंग जांच के साथ-साथ 181 हेल्पलाइन के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से ही ‘गूंज’ का आयोजन किया जा रहा है।

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biker Pallavi - फोटो : जी पॉल

इन जिलों में बेटा-बेटी के बीच बड़ा अंतर: एक सवाल के जवाब में पल्लवी ने बताया कि 23 दिसंबर को बुलंदशहर से जिस ‘गूंज’ कार्यक्रम का आगाज हो रहा है, दरअसल उससे पहले एक सर्वे उन्होंने भी किया है। जिसमें पता चला कि बागपत, मेरठ, शामली और मुज्जफरनगर इलाके में बेटा-बेटी के बीच अंतर ज्यादा है। यहां का लिंगानुपात प्रति हजार 824 है।

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