साल 2018 में शहीद हुए देवभूमि के ऐसे बेटे जिनकी शहादत ने उनके परिवार को ही नहीं बल्कि पूरे देश को रुला दिया। इसमें कोई अपने परिवार में बहनों का इकलौता भाई था, कोई बेटी की शादी न देख पाया, तो किसी के सिर सेहरा सजने वाला था। चलिए जानते हैं उन बेटों के बारे में...
वो बेटे जिनकी शहादत ने पूरे देश को रुलाया, कोई था बहनों का इकलौता भाई तो किसी के सिर सजना था सेहरा
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माइन ब्लास्ट में उड़े शरीर के चिथड़े
तीन दिसंबर को जम्मू-कश्मीर के पलांवाला सेक्टर में एक विस्फोट के दौरान शहीद हुआ सूरज सिंह भाकुनी शहीद होने के एक हफ्ते पहले जल्द लौटने का वायदा करके ड्यूटी पर गया सूरज इस हाल में लौटेगा, मां ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। मां अंतिम समय में बेटे का चेहरा भी नहीं देख सकी। दरअसल, धमाके में सूरज के शरीर के चीथड़े उड़ गए थे और शरीर के कुछ अवशेष ही मिल सके थे, जिन्हें सेना के जवान बॉक्स में लेकर आए थे। आठ कुमाऊं के सूरज के पार्थिव शरीर को रामेश्वर घाट में सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही शहीद की पार्थिव देह उनके पैतृक गांव लाई गई, वहां कोहराम मच गया। सूरज के अंतिम दर्शन को पूरा गांव उमड़ आया। हर किसी की आंखों में आंसू थे।
शादी के लिए दुल्हन ढूंढ रहे थे परिजन
28 अक्टूबर को अनंतनाग में शहीद हुए राजेंद्र सिंह घर के इकलौते चिराग थे। उनकी तीन बहने हैं। जिस बेटे के लिए घरवाले दुल्हन की तलाश कर रहे थे, वो उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर चला गया। शव को देख बहनें भाई से लिपटकर रो पड़ीं। शहीद का शव जब उनके पैतृक आवास लाया गया तो वहां कोहराम मच गया। पूरा गांव फूट फूट कर रोया। बहने और मां बेसुध हो गईं। गांव में बस चारों तरफ चीखें ही सुनाई दी। दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल में आतंकियों की ओर से सेना के कैंप पर किए गए हमले में राजेंद्र सिंह बुंगला (23) पुत्र चंद्र सिंह जाट रेजीमेंट (टीए) में सिपाही थे। वह वर्ष 2015 में भर्ती हुए थे। राजेंद्र शहादत से दो माह पहले ही राष्ट्रीय राइफल (आरआर) में तैनात हुए थे। राजेंद्र की शहादत की खबर मिलने के बाद उसके घर में कोहराम मचा गया।
गुरेज में आतंकियों को धूल चटाकर दी शहादत
9 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा गुरेज सेक्टर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए 36वीं राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात कोटद्वार के शिवपुर गांव निवासी राइफलमैन शहीद मनदीप सिंह रावत ने आतंकियों को धूल चटाने के बाद शहादत दी। सेना और पुलिस की सुरक्षा में शहीद के पार्थिव शरीर को राजकीय बेस अस्पताल में रखा गया।देहरादून जौलीग्रांट से हैलीकॉप्टर से शहीद मनदीप सिंह के पार्थिव शरीर को शाम करीब छह बजे आर्मी के गबर सिंह कैंप लाया गया।इसके बाद अगले दिन उनको अंतिम विदाई दी।
सीने में गोली लगने पर पर भी नहीं मानी हार
24 जून को सीने से गोली आर पार होने के बाद भी 22 साल के योगेश परगाईं ने हार नहीं मानी और मोर्चा संभाले रहे। हालांकि, ज्यादा खून बह जाने के कारण वह अधिक देर तक उग्रवादियों का सामना नहीं कर पाए और देश के लिए प्राणों की आहुति दे दी। हमले में उग्रवादी की एक गोली योगेश के सीने से आर-पार हो गई। घायल हालत में भी योगेश पीछे नहीं हटे। उन्होंने तुरंत पोजिशन ली और दुश्मन के खिलाफ बंदूक तान दी। खून ज्यादा बहने से वह बेहोश हो गए। साथी सैनिकों ने उन्हें कैंप से अस्पताल पहुंचाया तब तक वह देश के लिए जान न्योछावर कर चुके थे। घर में सबसे छोटे लाडले योगेश का पार्थिव शरीर देखकर मां तारी देवी, बहन नीमा भंडारी और भाभी कमला बदहवास हो गईं। परिजन उन्हें बार-बार होश में लाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वो बेसुध ही रहीं।