विश्व प्रसिद्ध चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री से उत्तराखंड की देश दुनिया में पहचान है। लेकिन यहां कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं जो पर्यटकों की नजरों से दूर हैं। इन पर्यटन स्थलों की खूबसूरती देखते ही बनती है। वहीं, तीर्थाटन के साथ ही अब सरकार का साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर है। साहसिक पर्यटन को रोजगार से जोड़कर नए स्थलों को विकसित करने पर काम किया जा रहा है। वहीं, कोरोना महामारी से पर्यटन उद्योग को हुए नुकसान के लिए शीतकालीन पर्यटन बढ़ावा देने की सरकार की योजना है।
विश्व पर्यटन दिवस: सैलानियों की नजरों से दूर हैं उत्तराखंड के ये खूबसूरत और अनजाने स्थल, तस्वीरें देख आना चाहेंगे यहां...
तीर्थाटन के साथ ही अब सरकार का साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर है। साहसिक पर्यटन को रोजगार से जोड़कर नए स्थलों को विकसित करने पर काम किया जा रहा है।
टिहरी झील की फ्लोटिंग हट्स आकर्षण का केंद्र
घनसाली से लेकर चिन्यालीसौड़ तक 42 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली टिहरी झील पर्यटकों के लिए आकर्षण केंद्र बन गई है। साहसिक खेलों के शौकीन पर्यटक झील में दिन में बोटिंग का लुत्फ उठा रहे हैं और रात फ्लोटिंग हट्स में गुजारते हैं। पर्यटकों के लिए पानी पर बनाई गई हट में पहाड़ों के बीच रात गुजराना अनोखा अनुभव है। केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत झील किनारे कोटी कॉलोनी में पर्यटन सुविधाओं का विकास कर बोट्स का संचालन किया जा रहा है। झील में गोरण के पास 11 करोड़ की लागत से 20 फ्लोटिंग हट्स भी बनाए गए हैं। हट्स पूरी तरह इको फ्रेंडली और आरामदायक हैं। हट्स में गर्मी और सर्दी का अहसास बिल्कुल नहीं होता है। हट्स में ठहरने वाले पर्यटकों को उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ देशी-विदेशी व्यंजन भी परोसे जाते हैं। कोटी कॉलोनी में आठ लॉग हट्स और थ्री स्टार टिहरी लेक रिजॉर्ट भी बनाया गया है। पर्यटकों के लिए झील में करीब 10 तरह की 100 बोटों का संचालन किया जा रहा है।
59 साल बाद खुली गरतांग गली, बनी पर्यटकों की पंसद
भारत-चीन सीमा के निकट नेलांग घाटी में 59 साल बाद पर्यटकों के लिए गरतांग गली एक सैलानियों के लिए नया डेस्टिनेशन बनकर उभरी है। समुद्र तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर खड़ी चट्टान को काटकर तैयार रास्ते का 64 लाख रुपये की लागत से जीर्णोद्धार किया गया है। भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक संबंधों की गवाह गरतांग गली करीब 150 साल पुरानी है। इसके बारे में कहा जाता है कि 150 मीटर लंबे इस पैदल ट्रेक का निर्माण पेशावर के पठानों ने किया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसका निर्माण जादूंग गांव के सेठ धनीराम ने कामगारों की मदद से कराया था। इस रास्ते के जरिये भारत और तिब्बत के व्यापारी सुमला, मंडी से होते हुए उत्तरकाशी पहुंचकर नमक, मसाले, पशमीना ऊन और गुड़ का व्यापार किया करते थे। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद इनर लाइन क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर इसे बंद कर दिया गया था। यह जर्जर हो गई थी। वर्ष 2015 में गृह मंत्रालय ने नेलांग व जादूंग को पर्यटकों के लिए खोलने का निर्णय लिया। बाद में गरतांग गली का जीर्णोद्धार कर इसी साल 18 अगस्त को इसे पर्यटकों के लिए खोला गया।
पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभर रहा है नागताल
केदारघाटी में फाटा से तीन किमी ऊपर घने जंगल के बीच स्थित नागताल जिले में पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। पर्यटन विभाग द्वारा इस रमणीक स्थल के प्रचार-प्रसार के लिए योजना बनाई गई है। साथ ही फाटा-जामू-नागताल ट्रेकिंग रूट को भी विकसित किया जा रहा है। इसी ट्रेकिंग रूट पर महर्षि जमदग्नि का प्राचीन आश्रम व नानतोली देवी का मंदिर भी है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। यहां से हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं के साक्षात दर्शन होते हैं।नागताल तक पहुंचाने के लिए पर्यटकों को रुद्रप्रयग-गौरीकुंड राजमार्ग से फाटा पहुंचना होगा। यहां से लगभग तीन किमी पैदल दूरी पर वर्षभर साफ जल से भरा नागताल है। साथ ही चारों तरफ देवदार व अन्य प्रजाति के पेड़ों का सघन वन है।
देहरादून का आनंदवन पर्यटकों को खींच रह अपनी ओर
देहरादून के झाझरा में विकसित आनंदवन सैलानियों की नई सैरगाह के रूप में तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है। यहां पर ध्यान केंद्र, कृत्रिम बुग्याल (हरियाले घास के मैदान ), जड़ी बूटियों वाली नक्षत्र वाटिका, ट्री हट, बंबू हट, उत्तराखंड में मिलने वाले जीवजंतु जैसे हाथी, तेंदुआ, बाघ की प्रतिकृतियां सबको लुभाती हैं। उत्तराखंड की परंपरा को देखते हुए हट के नाम केदार कुटीर और बद्री कुटीर रखे गए हैं। इसके अलावा यहां साहसिक पर्यटन की भी सामग्री मौजूद है। इसमें बर्मा ब्रिज, कमांडो नेट और जिप लाइन जैसी चीजें युवाओं को खास तौर पर अपनी ओर खींच रही हैं। बच्चों को लुभाने के लिए यहां बटर फ्लाई गार्डन और बर्डिंग पैराडाइज बनाया गया है। आनंदवन सोमवार को बंद रहता है। सुबह 10 बजे से पांच बजे तक खुला रहता है। यह देहरादून रेलवे स्टेशन से लगभग 13 और आईएसबीटी से 15 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां ऑटो, सिटी बस और टैक्सी के जरिए आराम से पहुंचा जा सकता है।