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विश्व पर्यटन दिवस: भारत के इस 'घर' में सैर सपाटा ही नहीं, गोबर ढोकर भी खुशी मनाते हैं विदेशी पर्यटक

Thu, 27 Sep 2018 07:00 AM IST
दीपक सिंह नेगी/अमर उजाला, हल्द्वानी
दीपक सिंह नेगी/अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Thu, 27 Sep 2018 07:00 AM IST
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World Tourism Day 2018 Foreigners learn indian culture in haldwani homestay
haldwani homestay

होम स्टे के बारे में आपने खूब पढ़ा और सुना होगा, लेकिन आज हम आपको ऐसे होम स्टे से रूबरू करा रहे हैं जो अपने आप में अनोखा है। यहां सैलानी घूमने के बजाय कुछ सीखने के लिए आते हैं। वे गोशाला में गोबर ढोते हैं। सिलाई-बुनाई, खेती किसानी, बढ़ई, राजमिस्त्री आदि काम भी सीखते हैं। उन्हें समय का पालन करना भी जरूरी होता है। 

World Tourism Day 2018 Foreigners learn indian culture in haldwani homestay
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यह होम स्टे बागेश्वर के कांडा सुनाट गांव में है। इसे 1988 में जीवन लाल वर्मा ने शुरू किया था। गांव में एक्टिविटी एरिया बनाया गया है। यहां आने वाले पर्यटक न सिर्फ सैर सपाटा करते हैं बल्कि हिंदुस्तानी संस्कृति, जीवनशैली को समझने के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

World Tourism Day 2018 Foreigners learn indian culture in haldwani homestay
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यहां समय प्रबंधन भी गजब का है। यानी पर्यटकों को सुबह छह बजे उठना होता है और रात नौ बजे सोना। होम स्टे में नशा आदि का सेवन वर्जित है। यहां पर्यटक औसतन दो हफ्ते तक ठहरते हैं और अपनी रुचि के अनुसार काम करते हैं। 

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जीवन लाल वर्मा ने बताया कि 20-22 वर्ष की आयु में वह जैंती में एक कार्यक्रम में गए थे। वहां दिल्ली निवासी एक व्यक्ति ने उनसे पूछा कि क्या वह कुछ विदेशी पर्यटकों को उन्हें गांव वर्क कैंप के लिए भेज सकते हैं। उन्होंने हामी भरी तो कुछ विदेशी सैलानी उनके  गांव में रहने आने लगे। 1988 में जीवन लाल वर्मा ने पर्यटन विभाग में पंजीकरण कर अपने यहां होम स्टे शुरू किया। जीवन के अनुसार उनकी पत्नी हेमा, बड़े बेटे जितेंद्र, बहू चंद्रकला, छोटा बेटा देश दीपक, नाती गौतम और शुभम भी सहयोग करते हैं।  

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जीवन लाल वर्मा ने बताया कि अपनी आमदनी से वह जरूरतमंदों पर 50 फीसदी धनराशि खर्च कर उनकी मदद करते हैं। उन्होंने बताया कि 2013 में आई आपदा के बाद से पर्यटकों की संख्या कम होने लगी थी लेकिन अब फिर से धीरे-धीरे सैलानियों की संख्या बढ़ने लगी है।

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