महिला दिवस पर हम आपको बताते हैं एक ऐसी बेटी की कहानी जिसने अपनी दिव्यांगता को आपने हुनर के आगे झुकने नहीं दिया। हाथ नहीं थे उन्होंने पैरों को ही अपना सहारा बनाया और अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उनकी खासी पहचान है।
हम बात कर रहे हैं ऋषिकेश निवासी अंजना मालिक की। जिन्होंने हालातों से हार नहीं मानी और आज सबके लिए नजीर बन गई हैं। अंजना एक गरीब परिवार से हैं। उनके हाथ नहीं थे तो वे एक समय भीख मांगने को मजबूर थीं, लेकिन आज वह अपने हुनर को पैरों से जिंदा रखे हुए हैं।
ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम के सड़क किनारे अंजना ऐसा काम कर रही हैं जिसे आम आदमी करने की भी नहीं सोच सकता है। जानकारी के अनुसार अंजना मूलरूप से पीलीभीत की रहने वाली हैं। जन्म से ही उनके दोनों हाथ नहीं थे। लेकिन उन्होंने अपने जीवन को बेरंग नहीं होने दिया।
बकौल अंजना मेरी जिंदगी हमेशा से ऐसी नहीं रही है। परिवार के हालात को देखते हुए हमने यूपी छोड़ दिया। लेकिन ऋषिकेश आने के बाद खाने के पैसे तक नहीं होते थे। घर में एक और सदस्य दिव्यांग है। इसलिए उन्होंने ही जिम्मा संभाला। उन्होंने लंबे वक्त तक गंगा घाटों पर सैलानियों से भीख मांगी है।
उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले वह गंगा घाट पर बैठकर पैर से कुछ लिख रही थी। वहां एक अमेरिकी महिला आई और उन्होंने देखा कि अंजना ने ओम और राम लिखा है। यह देखकर वह महिला ही अंजना की खेवहार बन गई। स्टीफेनी (अमेरिकी महिला) ने उन्हें पेंटिंग बनाना सिखाया।