लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इनमें अनुराग वत्स की अलग पहचान है। अपराधियों पर सख्ती को लेकर चर्चित अनुराग वत्स ने बेगुनाहों को इंसाफ दिलाने में भी अहम भूमिका अदा की थी।
2013 बैच के आईपीएस अनुराग वत्स ने लखनऊ के पुलिस अधीक्षक उत्तरी के पद पर तैनाती साथ ही रणनीति बनाकर अपराधियों की धरपकड़ के साथ पुलिसकर्मियों की निरंकुशता पर शिकंजा कसा। मनमानी के लिए चर्चित कई थानेदार परेशान होने लगे। पूरे जिले में संगीन वारदात पर मौके पर पहुंचने से आला अफसरों का भरोसा जीता।
इलाके में बड़ी वारदात को चुनौती के तौर पर लेकर बदमाशों की धरपकड़ कराने वाले अनुराग वत्स ने गोमतीनगर इलाके में डकैती की पड़ताल के दौरान बांग्लादेश के नंबरों को चिह्नित किया। तीन महीने तक गिरोह के पीछे लगे रहे। पुलिस की गतिविधियों का पता लगा रहे डकैतों के बांग्लादेश से कूच करते ही उन्हें भनक लग गई।
डकैतों के पहुंचने से पहले तीन सौ पुलिसकर्मियों से विभिन्न स्थानों के रेलवे ट्रैक पर घेराबंदी कराई। डकैती से पहले ही मुठभेड़ में पुलिस की गोली से घायल दो बांग्लादेशी डकैत दबोचे गए। अनुराग अपनी टीम के साथ रात तीन बजे तक क्षेत्र में सक्रिय रहते थे। संगीन वारदात पर मीडिया बेहिचक जानकारी देने से अपराध छिपाने की परंपरा पर अंकुश लगने लगा।
पीजीआई इलाके में रसूखदार द्वारा बेटी की हत्या के मामले में अनुराग वत्स ने दबाव व सिफारिशों की परवाह न करते हुए कार्रवाई कराई। तेजतर्रार पुलिसकर्मियों के साथ खड़े रहकर मातहतों का विश्वास जीता। उच्चाधिकारियों ने पीड़ितों को उनके दफ्तर में भेजकर जनशिकायतों की सुनवाई की परीक्षा ली। सही शिकायत पर न सिर्फ तुरंत कार्रवाई, बल्कि पीड़ित को कॉल करके हाल पूछने की बात सामने आई।